पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक बढ़त के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी. चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरे जिन्होंने 20 से ज्यादा रैलियां कीं और बंगाल के स्थानीय रंग में रंगे नजर आए. हालांकि बीजेपी ने पहले से किसी चेहरे का ऐलान नहीं किया था लेकिन अमित शाह ने बार-बार यह साफ किया था कि राज्य का मुख्यमंत्री कोई ‘बंगाली’ ही होगा. अब जबकि जनता ने ‘ब्रांड मोदी’ पर भरोसा जताया है तो पार्टी एक ऐसे कद्दावर नेता की तलाश में है जो बंगाल की सत्ता को मजबूती से संभाल सके.
शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष के अनुभव और जमीनी पकड़
मुख्यमंत्री पद के टॉप दावेदारों में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे ऊपर है जिन्होंने 2021 में ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हराकर अपनी ताकत साबित की थी. उनके पास मजबूत सांगठनिक नेटवर्क और जमीनी पकड़ है लेकिन नारदा स्टिंग मामले में नाम होना उनके लिए एक रुकावट बन सकता है. वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को भी एक मजबूत विकल्प माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी को मुख्य विपक्षी दल बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है. इन दोनों नेताओं के अलावा समीक भट्टाचार्य का नाम भी चर्चा में है जिन्हें पार्टी में सबको साथ लेकर चलने वाले एक सुलझे हुए नेता के रूप में देखा जाता है.
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क्या महिला मुख्यमंत्री पर दांव खेलेगी बीजेपी?
बीजेपी ने पूरे चुनाव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को अपना मुख्य मुद्दा बनाया था जिसे देखते हुए किसी महिला नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना काफी बढ़ गई है. इस रेस में मशहूर अभिनेत्री और विधायक रूपा गांगुली का नाम काफी सुर्खियों में है जिनकी लोकप्रियता और महिला मोर्चा में उनके काम को देखते हुए पार्टी उन पर विचार कर सकती है. उनके साथ ही आसनसोल दक्षिण से विधायक अग्निमित्रा पॉल भी एक सशक्त दावेदार हैं जो अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जानी जाती हैं. अगर पार्टी अपनी महिला-समर्थक छवि को और मजबूत करना चाहती है तो इन दोनों में से किसी एक को मौका मिल सकता है.
नए चेहरों की चर्चा और शीर्ष नेतृत्व का फैसला
इन प्रमुख नामों के अलावा निशिथ प्रामाणिक जैसे युवा चेहरों का नाम भी मुख्यमंत्री पद की चर्चाओं में शामिल हो रहा है. पार्टी के भीतर सुकांत मजूमदार के उस दावे की भी चर्चा है जिसमें उन्होंने कहा था कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री ‘मांसाहारी’ होगा जो सीधे तौर पर बंगाली पहचान से जुड़ा संकेत है. अब सबकी निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं जहाँ प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी को यह तय करना है कि ऐतिहासिक जीत के बाद ‘सोनार बांग्ला’ के सपने को साकार करने के लिए कौन सबसे उपयुक्त चेहरा होगा. फिलहाल बंगाल की राजनीति में नेतृत्व को लेकर सस्पेंस बरकरार है और कयासों का बाजार गर्म है.
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