नोएडा एयरपोर्ट कोड से जुड़ी मुख्य बातें:

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार से पहले इसके अंतरराष्ट्रीय कोड 'DXN' को स्थापित किया जा रहा है.
  • इस खास और यूनिक कोड को जमीन से लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर बेहद विशाल अक्षरों में लगाया जाएगा.
  • इस बड़े ढांचे को टिकाऊ और आकर्षक बनाने के लिए आरसीसी के प्लेटफार्म पर मजबूत स्टील से तैयार किया जा रहा है.
  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यह तीन अक्षरों का प्रसिद्ध कोड इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने दिया है.
  • यह यूनिक कोड पूरी दुनिया में जेवर में बन रहे इस नए एयरपोर्ट की एक विशिष्ट भौगोलिक पहचान को दर्शाएगा.

Noida Airport: उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सफर करने वाले देशी-विदेशी हवाई यात्रियों के लिए एक बेहद दिलचस्प और खास खबर आई है. इस आलीशान एयरपोर्ट पर कदम रखने वाले यात्रियों का सबसे पहला और भव्य स्वागत किसी आम बोर्ड से नहीं बल्कि एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय कोड 'DXN' से होने जा रहा है. एयरपोर्ट प्रबंधन ने फैसला किया है कि इस खास कोड को हवाई अड्डे के मुख्य प्रवेश द्वार से ठीक पहले बेहद आकर्षक और विशाल रूप में स्थापित किया जाएगा ताकि यहां आने वाले हर एक मेहमान को एक बिल्कुल नया और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अहसास मिल सके.

30 फीट की ऊंचाई पर तैयार हो रहा है खास ढांचा

इस अनोखे स्वागत बोर्ड को कोई साधारण बोर्ड नहीं बल्कि एक बड़े लैंडमार्क के रूप में तैयार किया जा रहा है. इसे जमीन से लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर स्थापित किया जा रहा है ताकि यह दूर से ही लोगों को आसानी से दिखाई दे सके. इस विशालकाय कोड को बनाने के लिए सबसे पहले आरसीसी यानी सीमेंट और कंक्रीट का एक बेहद मजबूत बेस प्लेटफार्म तैयार किया गया है. इसी मजबूत चबूतरे के ऊपर उच्च गुणवत्ता वाले चमकदार स्टील का इस्तेमाल करके 'DXN' के अक्षरों को एक सुंदर और आधुनिक डिजाइन में मूर्त रूप दिया जा रहा है जो भविष्य में यात्रियों के लिए एक बड़ा सेल्फी पॉइंट भी बन सकता है.

क्या होता है आईएटीए का तीन अक्षरों वाला कोड?

हवाई यात्रा की दुनिया में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर इस 'DXN' का मतलब क्या है. दरअसल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन यानी आईएटीए की तरफ से यह तीन अक्षरों का एक विशेष कोड दिया गया है. आईएटीए कोड दुनिया के प्रत्येक हवाई अड्डे को मिलने वाला एक पूरी तरह से यूनिक और सबसे अलग कोड होता है. यह किसी भी एयरपोर्ट की वैश्विक पहचान के रूप में ठीक उसी तरह काम करता है जैसे हमारे घरों के पते के लिए पिन कोड काम करता है, जिसे तकनीकी भाषा में लोकेशन आइडेंटिफायर भी कहा जाता है.

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कहां-कहां होगा इस कोड का इस्तेमाल?

यह यूनिक 'DXN' कोड केवल एयरपोर्ट के गेट पर सजावट के लिए नहीं लगाया जा रहा है बल्कि हवाई अड्डे के हर एक महत्वपूर्ण कामकाज में इसकी सबसे बड़ी भूमिका होगी. हवाई यात्रियों के सफर के मुख्य दस्तावेज जैसे उनकी हवाई टिकट, बोर्डिंग पास और सामान पर लगने वाले टैग से लेकर फ्लाइट्स के संचालन व संवाद में इसी कोड का आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया जाएगा. इस कोड के फाइनल होने और अब इसके प्रवेश द्वार पर सजने से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वैश्विक पटल पर आने की प्रक्रिया बहुत ज्यादा तेज हो गई है, जिसका इंतजार पूरे देश को है.

एयरपोर्ट कोड के मायने और फायदे:

  • भव्य और मॉडर्न लुक: 30 फीट ऊंचे स्टील के अक्षरों वाला यह प्रवेश द्वार एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों को एक वर्ल्ड-क्लास स्वागत का अहसास कराएगा.
  • ग्लोबल पिन कोड की तरह काम: यह 'DXN' कोड दुनिया भर के एविएशन सिस्टम में एक यूनिक लोकेशन आइडेंटिफायर यानी पिन कोड की तरह काम करेगा जिससे कोई भ्रम नहीं होगा.
  • दस्तावेजों में आसानी: यात्रियों के हवाई टिकट, बोर्डिंग पास, लगेज टैग और एयरलाइंस के आपसी कम्यूनिकेशन में अब इसी तीन अक्षर के कोड का उपयोग किया जाएगा.
  • ब्रांडिंग और सेल्फी पॉइंट: मुख्य गेट के ठीक पहले इतनी ऊंचाई पर बनने वाला यह खास स्ट्रक्चर नोएडा एयरपोर्ट की ब्रांडिंग को मजबूत करेगा और यात्रियों के आकर्षण का केंद्र बनेगा.
  • उद्घाटन की तैयारियों को गति: इस तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतीकों को धरातल पर मजबूत रूप देने से साफ है कि एयरपोर्ट को जल्द शुरू करने का काम अंतिम चरण में है.