मुख्य बिंदु

  • उत्तराखंड की सरकार नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर के विस्तार का प्लान बना रही है. अब तक ये रेल लिंक दिल्ली से मेरठ तक है, जो आगे चलकर हरिद्वार और ऋषिकेष तक जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है.
  • इस नए रेल कोरिडोर से उत्तराखंड और यूपी के लोगों को बड़ा फायदा होगा. लोकल टूरिज्म भी बेहतर होने की उम्मीद है, इससे अर्थव्यवस्था भी बेहतर होगी, साथ ही सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक भी कम हो सकता है.
  • नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से शुरू होगा और उत्तराखंड में एंट्री करने से पहले मुजफ्फरनगर से होकर गुजरेगा. जो लोग जल्द और किफायती सफर चाहते हैं, उनके लिए ये गुड न्यूज है.

Namo Bharat Rail Extension from Meerut to Rishikesh: उत्तराखंड 'नमो भारत' रैपिड रेल नेटवर्क को राज्य के करीब लाने की योजना पर आगे बढ़ रहा है. अधिकारी 'रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम' (RRTS) को मेरठ से ऋषिकेश तक बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. इस प्रस्तावित विस्तार से मेरठ का मोदीपुरम इलाका लक्ष्मण झूला क्षेत्र से जुड़ जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच यात्रा का एक तेज कॉरिडोर बनेगा.

दोनों राज्यों की सरकारें सहमत

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों तथा 'नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन' (NCRTC) के बीच बातचीत के बाद इस प्रस्ताव को गति मिली है. खबरों के मुताबिक, सभी पक्ष इस विस्तार के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए हैं और तकरीबन 150 किलोमीटर लंबे रूट के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) का सर्वे जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है.

टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रोजेक्ट के संभावित फायदों पर जोर देते हुए कहा कि इससे दिल्ली-एनसीआर एरिया के साथ ट्रांसपोर्ट लिंक मजबूत होगा और साथ ही टूरिज्म, तीर्थयात्रा और कमर्शियल ग्रोथ को भी बढ़ावा मिलेगा. सीएम ने कहा, 'मेरठ से ऋषिकेश तक 'नमो भारत' रेल सेवा का विस्तार उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को एक नई दिशा देगा. तीर्थयात्रियों, सैलानियो और स्थानीय निवासियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधाओं का फायदा मिलेगा.'

रूट क्या होगा?

प्रस्तावित रूट के मुताबिक, ये कॉरिडोर मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से शुरू होगा और उत्तराखंड में एंट्री करने से पहले मुजफ्फरनगर से होकर गुजरेगा. इसके बाद यह रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे अहम शहरों से होते हुए लक्ष्मण झूला के पास खत्म होगा. कुल रूट की लंबाई में से तकरीबन 72 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में और लगभग 78 किलोमीटर का हिस्सा उत्तराखंड में होगा. प्रोजेक्ट पूरा होने पर क्षेत्रीय आवागमन में सुधार, यात्रा के समय में कमी और जुड़े हुए क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.