मुख्य बिंदु
- गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे को यूपी में 700 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के तौर पर बनाने का प्लान है.
- ये प्रोजेक्ट पश्चिमी से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक 22 जिलों और 37 तहसीलों को जोड़ेगा.
- शामली और गोरखपुर के बीच सफर का वक्त काफी कम होने की उम्मीद है.
- निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए इस रूट के कुछ हिस्सों में एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का प्लान है.
- इसका निर्माण 2026-27 में शुरू हो सकता है और 2030 तक इसके पूरा होने का टारगेट है.
UP Plans 700-km Gorakhpur–Shamli Expressway: गोरखपुर-शामली के बीच बन रहे एक्सप्रेसवे को ग्रीनफील्ड सुपर एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है, पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ेगा. यूपी सरकार ट्रांसपोर्टेशन को बेहतर बनाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के मकसद से एक और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी कर रही है. ये रोड तकरीबन 700 किलोमीटर लंबा होगा.
इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
ये बड़ा कॉरिडोर शामली जिले से शुरू होकर गोरखपुर तक जाएगा, जो 22 जिलों से होकर गुजरेगा और 37 तहसीलों को जोड़ेगा. चालू होने के बाद, इसके राज्य के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक बनने की उम्मीद है, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच ट्रैवल टाइम काफी कम हो जाएगा और यात्रियों व सामान की आवाजाही बेहतर होगी. शुरुआती योजनाओं के मुताबिक, ये रूट शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बस्ती, संत कबीर नगर और गोरखपुर से होकर गुजरेगा.
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इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का प्लान
रोड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के अलावा, राज्य सरकार एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों के साथ एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलप करने पर भी विचार कर रही है. मेरठ और बिजनौर जैसे जिलों को नए इंडस्ट्रियल इंवेस्टमेंट, व्यापार के मौकों और रोजगार पैदा होने से फायदा होने की उम्मीद है. अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य 2026 के आखिर या 2027 की शुरुआत में शुरू हो सकता है. अगर प्रोजेक्ट तय समय के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो पूरा एक्सप्रेसवे 2030 तक बनकर तैयार हो सकता है.
यूपी में बढ़ता एक्सप्रेसवे नेटवर्क
प्रस्तावित कॉरिडोर यूपी के तेजी से बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करेगा, जिसमें पहले से ही गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. नए रूट से राज्य भर में क्षेत्रीय विकास, व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है.
निष्कर्ष
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे का प्लान उत्तर प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार रणनीति में एक और बड़ा कदम है. राज्य के प्रमुख जिलों को आपस में जोड़कर, इस प्रोजेक्ट से ट्रांसपोर्टेशन की क्षमता बेहतर होने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. प्लांड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर कई क्षेत्रों में आर्थिक विकास को और तेज कर सकता है. पूरा होने पर, ये एक्सप्रेसवे राज्य के पहले से ही बड़े रोड नेटवर्क को और मजबूत करेगा और यूपी के लाखों निवासियों, व्यवसायों और माल ढुलाई करने वालों के लिए तेज और ज्यादा भरोसेमंद कनेक्टिविटी देगा.
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