UP News: उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच अब दो नए नॉर्थ-साउथ हाईवे कॉरिडोर की तैयारी शुरू हो गई है. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद पूर्वांचल और नेपाल सीमा से जुड़े कई जिलों की तस्वीर बदल सकती है. बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, यात्रा, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इन दोनों कॉरिडोर के कुछ हिस्सों के निर्माण को मंजूरी दे दी है और टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिसके बाद जल्द ही भूमि अधिग्रहण का काम शुरू होने की संभावना है. अधिकारियों के मुताबिक इन हाईवे प्रोजेक्ट्स से करीब 12 जिलों को सीधा फायदा मिलेगा और कई पिछड़े इलाके फोरलेन सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे.
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कॉरिडोर-1: कुशीनगर-वाराणसी कॉरिडोर
पहला कॉरिडोर कुशीनगर से शुरू होकर देवरिया और गाजीपुर होते हुए सीधे वाराणसी को जोड़ेगा. करीब 220 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का उद्देश्य धार्मिक और व्यापारिक शहरों के बीच की दूरी को कम करना है. पीडब्ल्यूडी द्वारा कसया-देवरिया (31.5 किमी) और देवरिया-बरहज (21.75 किमी) मार्ग का निर्माण 342 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा. बता दें कि दोहरीघाट-गाजीपुर-वाराणसी खंड पहले से फोरलेन है, ऐसे में नए खंड के जुड़ने से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी.
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इस रूट पर पड़ने वाले प्रमुख जिले और उनकी अहमियत:
- कुशीनगर
- देवरिया
- मऊ (दोहरीघाट खंड के जरिए)
- गाजीपुर
- वाराणसी
कॉरिडोर-2: नेपाल सीमा पिपरी-प्रयागराज कारिडोर
दूसरा कॉरिडोर सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है. यह सीधे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पिपरी (सिद्धार्थनगर) को संगम नगरी प्रयागराज से जोड़ेगा. 295 किलोमीटर लंबा यह हाईवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को भी आपस में लिंक करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें 107 किलोमीटर के तीन खंडो का काम PWD 642 करोड़ रुपये के लागत से करेगा, वहीं 123 किलोमीटर का काम सड़क परिवहन एव राजमार्ग मंत्रालय(मोर्थ) 738 करोड़ की लागत से करेगा.
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इस कॉरिडोर से लाभान्वित होने वाले जिले:
- सिद्धार्थनगर (पिपरी-बर्डपुर-बांसी खंड)
- बस्ती (सिद्धार्थनगर से प्रयागराज के रास्ते में)
- संत कबीर नगर
- अमेठी (पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक के जरिए)
- सुलतानपुर
- प्रतापगढ़
- प्रयागराज
2 साल में तैयार होगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों कॉरिडोर के निर्माण में PWD के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) मिलकर काम करेंगे. फिलहाल 62 किलोमीटर के शुरुआती काम के लिए 725 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है. साथ ही, अभी 235 किमी कार्य स्वीकृत किए जाना शेष है. अधिकारियों का लक्ष्य है कि अगले 2 साल के भीतर इन सड़कों पर गाड़ियां दौड़ने लगें.
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क्या होगा आम जनता को फायदा?
इन हाईवे कॉरिडोर के निर्माण से पूर्वांचल के दर्जन भर जिलों की तस्वीर बदलने वाली है. बेहतर सड़कों का मतलब है, नए उद्योगों की स्थापना, रोजगार के अवसर और प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल. नेपाल सीमा से लेकर प्रयागराज तक का यह नेटवर्क शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़कर यूपी को 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' बनाने के सपने को पूरा करेगा. जब दूर-दराज के गांव और कस्बे सीधे हाईवे से जुड़ेंगे, तो खेती-किसानी से लेकर छोटे उद्योगों तक सबको एक बड़ा प्लेटफार्म मिलेगा.
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