उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों के आए नतीजों ने राज्य का सियासी नब्ज पूरी तरह साफ कर दिया है. स्नातक कोटे की 5 और शिक्षक कोटे की 6 सीटों पर हुए इस मुकाबले में कांटे की टक्कर देखने को मिली. कुल 11 सीटों में से BJP ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) 5 सीटों पर अपना परचम लहराने में कामयाब रही. इस चुनाव में BJP का सबसे दमदार प्रदर्शन पश्चिमी यूपी में देखने को मिला, जिसे RLD प्रमुख जयंत चौधरी का मजबूत गढ़ माना जाता है. पश्चिमी क्षेत्र की 5 MLC सीटों में से BJP ने 4 सीटों पर शानदार जीत हासिल की:
पश्चिमी क्षेत्र की किस सीट से कौन जीता?
- मेरठ स्नातक सीट: BJP के दिनेश गोयल जीते.
- मेरठ शिक्षक सीट: BJP के श्रीचंद शर्मा विजयी रहे.
- बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट: BJP के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने कब्जा जमाया.
- आगरा स्नातक सीट: BJP के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत हासिल की.
इस इलाके में सपा के खाते में सिर्फ एक आगरा शिक्षक सीट गई, जहां से डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की.
पूर्वांचल और बुंदेलखंड में सहयोगी रहे बेअसर
पश्चिमी यूपी में जलवा बिखेरने वाली BJP को पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में बड़ा झटका लगा. यहां ओम प्रकाश राजभर (सुभासपा), अनुप्रिया पटेल (अपना दल-एस) और संजय निषाद (निषाद पार्टी) के प्रभाव वाले इलाकों में सहयोगियों का गणित काम नहीं आया.
- पूर्वांचल: 3 सीटों में से BJP सिर्फ 1 सीट जीत सकी. गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर BJP के ध्रुव कुमार त्रिपाठी किसी तरह जीते, लेकिन वाराणसी की दोनों सीटें BJP के हाथ से निकल गईं.
- अवध बेल्ट: लखनऊ शिक्षक सीट पर BJP के उमेश द्विवेदी ने जीत की हैट्रिक लगाई, लेकिन लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह पटेल ने BJP को हरा दिया.
- बुंदेलखंड: इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने BJP प्रत्याशी को शिकस्त देकर सीट पर कब्जा कर लिया.
पश्चिमी यूपी में RLD का नेटवर्क रहा मददगार
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 5 में से 4 सीटों पर BJP ने परचम लहराया है. हालांकि एमएलसी चुनाव मुख्य रूप से शहरी और कॉलेज नेटवर्क के बीच लड़ा जाता है, लेकिन कस्बों और ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) का मजबूत जमीनी ढांचा BJP उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने में काफी काम आया.
यही वजह रही कि जाट और किसान बाहुल्य वाले इस इलाके में BJP 80 फीसदी सीटें जीतने में कामयाब रही. बरेली-मुरादाबाद, बिजनौर और संभल जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों के साथ-साथ मेरठ-सहारनपुर क्षेत्र में भी BJP को RLD के जुड़ाव का फायदा मिला.
पूर्वांचल और बुंदेलखंड में सहयोगी साबित हुए ‘फ्लॉप’
इसके उलट, पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में BJP को करारा झटका लगा. यहां पार्टी के सहयोगी दल-सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), अपना दल (एस) और निषाद पार्टी-पूरी तरह बेअसर साबित हुए.
- सुभासपा (ओपी राजभर): राजभर और ओबीसी वोटरों पर पकड़ का दावा करने वाले ओपी राजभर अपने प्रभाव वाले वाराणसी क्षेत्र में स्नातक और शिक्षक दोनों सीटें BJP को नहीं जिता सके. वे अपने कोर वोटरों को BJP के पाले में ट्रांसफर कराने में नाकाम रहे.
- अपना दल (एस) और निषाद पार्टी: संजय निषाद और अनुप्रिया पटेल का असर भी बुद्धिजीवी वर्ग में नहीं दिखा. मिर्जापुर-वाराणसी क्षेत्र की स्नातक सीट BJP हार गई. वहीं, लखनऊ स्नातक सीट पर BJP के कुर्मी उम्मीदवार होने के बावजूद सपा की कुर्मी प्रत्याशी ने बाजी मार ली.
जातिगत राजनीति पर भारी पड़े मुद्दे
पारंपरिक चुनावों में जातिगत समीकरण साधने वाले सहयोगी दल शिक्षक और स्नातक वर्ग में वोट ट्रांसफर कराने वाली ‘मशीन’ साबित नहीं हो सके. पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड की 6 सीटों में से BJP केवल 2 ही निकाल पाई. साफ है कि BJP को पश्चिमी यूपी में अपने संगठन और RLD के साथ से बड़ी जीत मिली, जबकि बाकी इलाकों में सपा ने युवाओं और शिक्षकों के मुद्दों को भुनाते हुए एनडीए को करारी शिकस्त दी.