Petrol Pump Rules: उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के जिलों में छाने वाले जहरीले धुएं और वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है. मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि अक्टूबर 2026 से एनसीआर के आठ जिलों में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) यानी पीयूसीसी के किसी भी गाड़ी को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा. इस कड़े नियम को पूरी तरह जमीन पर उतारने के लिए क्षेत्र के सभी 1,041 पेट्रोल पंपों पर बेहद आधुनिक ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे. यह कैमरे गाड़ी के आते ही उसकी नंबर प्लेट को स्कैन करके तुरंत पता लगा लेंगे कि गाड़ी का प्रदूषण सर्टिफिकेट वैध है या नहीं, जिसके बाद ही ईंधन की सप्लाई तय होगी.

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वर्ष 2026 में प्रदूषण कम करने का रखा बड़ा लक्ष्य

मुख्य सचिव ने वायु गुणवत्ता में सुधार को लेकर आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के दौरान एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर को 30 से 35 प्रतिशत तक कम करने का एक बड़ा और महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किया है. उन्होंने बैठक में मौजूद सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी तालमेल बिठाकर कड़ी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही सरकार का मानना है कि प्रदूषण के खिलाफ इस बड़ी जंग को बिना आम जनता की मदद के नहीं जीता जा सकता है, इसलिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर जनजागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे.

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'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नीति क्या है?

इस उच्चस्तरीय बैठक में वाहनों से होने वाले धुएं के उत्सर्जन, फैक्ट्रियों से निकलने वाले औद्योगिक प्रदूषण, सड़कों पर उड़ने वाली धूल, कंस्ट्रक्शन साइट्स से निकलने वाले मलबे के मैनेजमेंट, हरियाली बढ़ाने और पराली प्रबंधन से जुड़े तमाम उपायों की गहन समीक्षा की गई. सरकार 'नो PUCC, नो फ्यूल' नीति के साथ-साथ सड़कों से पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से यानी धीरे-धीरे हटाने की योजना पर भी तेजी से काम कर रही है. इसके लिए प्रशासन द्वारा 'नया सफर' नामक एक विशेष योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत आधुनिक तकनीक वाले बीएस-6, सीएनजी और पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों को मुख्य रूप से बढ़ावा दिया जाएगा.

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26 लाख से ज्यादा खटारा गाड़ियों की पहचान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एनसीआर के विभिन्न जिलों में अब तक करीब 26.19 लाख ऐसे वाहनों की पहचान की जा चुकी है जो अपनी जीवन-अवधि यानी तय उम्र पूरी कर चुके हैं. इस साल जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच ही 37,156 खटारा वाहनों को कबाड़ में बदला जा चुका है, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले 460 वाहनों को जब्त किया गया है. प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सरकार गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ जैसे व्यस्त शहरों में कुल 975 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लक्ष्य पर काम कर रही है. राहत की बात यह है कि वर्तमान में इन प्रमुख शहरों में 100 ई-बसें पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं.

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