मां-3 बच्चों के जिंदा जलने की आंखोंदेखी सुनाते हुए शख्स के आंसू छलके, जानें गाजियाबाद में कैसे हुआ अग्निकांड?

Ghaziabad House Fire Tragedy: गाजियाबाद में घर में लगी आग में महिला और 3 बच्चे जिंदा जलकर मर गए। मृतका के ससुर ने हादसे की आंखोंदेखी सुनाई है। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने बहू और 3 पोतों को बचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।

Ghaziabad House Fire Tragedy

आग में जलकर पूरा घर राख हो गया।

Ghaziabad House Fire Tragedy Eye Witness: दिल्ली से सटे गाजियाबाद में लोनी इलाके में कंचन पार्क के पास एक मकान में आग लगने से 4 लोग जिंदा जलकर राख हो गए। वहीं 4 लोग बुरी तरह झुलस गए। हादसे के समय घर में 8 लोग थे, जिनमें से 4 लोगों को अपना बचाव करने का मौका नहीं मिला। मृतकों में एक महिला, उसके 2 बच्चे और भतीजा शामिल है। मारे गए बच्चों की उम्र 7 से 9 साल के बीच थी। मृतकों में 32 वर्षीय गुलबहार पत्नी शाहनवाज, 9 वर्षीय जान पुत्र शाहनवाज, 9 वर्षीय शान पुत्र शाहनवाज और 7 वर्षीय भतीजा जीशान शामिल हैं।

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वहीं घायलों के नाम शमशाद, उसकी 30 साल की पत्नी आयशा, बेटा आयान और शाहनवाज है। पुलिस पूछताछ में घर के मालिक 64 साल हाजी फारूक ने अग्निकांड की आंखोंदेखी सुनाई तो उसके आंसू छलक गए। हादसे में उसने अपनी सबसे छोटी बहू और 3 पोतो को खो दिया। अग्निकांड में उन्हें जिंदगीभर न भूल सकने वाला गम दिया है। सारा घर भी जलकर राख हो गया। अब फिर से सिर पर छत बनानी होगी, फिर से वही संघर्ष और मेहनत करनी होगी।

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2 मकानों में रहते थे 5 भाइयों के परिवार

हाजी फारूक ने बताया कि हादसा सुबह करीब 4 बजे हुआ। कंचन पार्क के पास उनका करीब 50 गज में बना 3 मंजिला पुराना मकान है। उसके 5 बेटे नौशाद, दिलशाद, शहजाद, शमशाद, शहनवाज हैं। इकलौती बेटी की शादी हो चुकी है। इस मकान में 2 बेटे शमशाद और शाहनवाज रहते हैं। 3 बेटे अपने परिवार के साथ दूसरे मकान में रहते हैं। जब पुराने घर में आग लगी तो चीखने चिल्लाने की आवाजें दूसरे घर तक पहुंची। नौशाद, दिलशाद और शहजाद दौड़े आए।

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उन्होंने भाई, भाभी और भतीजों को बचाने की कोशिश की, लेकिन दूसरी मंजिल पर बने कमरे में इतना धुंआ भर गया कि कुछ नजर नहीं आया। आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठ रही थीं। गुलबहार अपने बेटों जान-शान और भतीजे जीशान को गोद में उठाकर बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी और शाहनवाज ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। पांचों भाई उन्हें बचाने में जुटे थे, लेकिन गुलबहार और बच्चे आग की लपटों से घर चुके थे।

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4 घायलों की हालत अब खतरे से बाहर

हाजी ने बताया कि गुलबहार और बच्चे चीखते चिल्लाते रह गए, लेकिन वह उन्हें बचा नहीं पाए। उन्होंने खिड़की से गुलबहार को आवाजा दी तो वह घबराकर उठी। तब तक उसके कमरे को आग अपनी चपेट में ले चुकी थी। उसने सबसे छोटे जीशान को कंधों पर लादा। किसी तरह अपने दोनों बेटों को गोद में उठाया और अपने साथ उनकी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। वह न खुद बाहर आ सकी और न ही बच्चों को बचा सकी।

यह बताते हुए हाजी फूट-फूट कर रोने लगे। हाजी ने बताया कि शाहनवाज, शमशाद और उसकी पत्नी आयशा भी आग में झुलस गईं। आयशा का 4 साल का बेटा भी घायल हुआ है। चारों को अस्पताल में भर्ती कराया और अब उनकी हालत खतरे से बाहर है, लेकिन शाहनवाज की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे। उसने एक झटके में अपने परिवार को खो दिया। अल्लाह यह कैसा दिन दिखाया है। कपड़ों के कारखाने ने पूरे घर को तबाह कर दिया।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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