उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक दलों ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी INDIA गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर विवाद हो सकता है। इसके संकेत कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के एक बयान से मिले हैं। हालांकि बीते दिनों समाजवादी पार्टी के सूत्रों के हवाले से सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने आया था, लेकिन शायद कांग्रेस उससे खुश नहीं है, इसलिए नई मांग करके अखिलेश यादव की टेंशन बढ़ा दी है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र का बड़ा बयान

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि हम एक राष्ट्रीय पार्टी हैं, हमें बराबर सीटें मिलनी चाहिए। पूरा देश कांग्रेस की ओर देख रहा है। हम INDIA गठबंधन को मजबूत करते हैं। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व को बराबर सम्मान और समानता मिलनी चाहिए। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व बैठकर फैसला करेंगे और मुकाबला बराबरी का होगा। इसका मतलब यह है कि कांग्रेस इस बार चुनाव आधी सीटों पर लड़ना चाहती है, जबकि समाजवादी पार्टी मजबूत और जीत वाली सीटें कांग्रेस को देने के पक्ष में है।

चुनावी जीत की गारंटी SP का फॉर्मूला होगा

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस 150 सीटें मांग सकती है और राजेंद्र पाल ने आधी सीटों पर दावा ठोका है। जबकि समाजवादी पार्टी 70 से 80 सीटें ही कांग्रेस को देने का मूड में है। समाजवादी पार्टी चुनावी जीत की गारंटी वाले सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर विचार कर रही है। समाजवादी पार्टी सीटें बांटते हुए यह देखेगी कि दोनों दल किस-किस सीट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं? यह भी देखा जाएगा कि किस सीट पर दोनों दलों में से किसका जनाधार मजबूत है? किसी सीट पर कौन-सी पार्टी चुनाव जीतने में सक्षम है, यानी इस बार जिस सीट पर जिस पार्टी का जनाधार मजबूत होगा और वह जीत सकती है, उसे वही सीट दी जाएगी।

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राजनीति गलियारों में क्या अटकलें चल रही?

उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा है कि राजेंद्र पाल गौतम ने आधी सीटों पर दावा ठोककर अखिलेश यादव पर दबाव बनाने की कोशिश की है। राजेंद्र का बयान कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। लेकिन चूंकि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं और वे शिद्दत से मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं तो वे कांग्रेस को नाराज करने का रिस्क नहीं लेंगे। क्योंकि अगर कांग्रेस को गठबंधन में मजबूत भूमिका मिली और ज्यादा सीटें मिली तो वह समाजवादी पार्टी के पाले में दलित और ब्राह्मण वोटों का शिफ्ट करा सकती है। ऐसे में कांग्रेस के साथ सही तरीके से सीट शेयरिंग करने में अखिलेश यादव का ही फायदा है।