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Sonprayag to Kedarnath: रोपवे बनने से सोनप्रयाग-केदारनाथ की दूरी रह जाएगी महज 40 मिनट, नहीं करनी पड़ेगी 16 किलोमीटर की ट्रैकिंग

Kedarnath Ropeway: सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे का लोगों को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इससे उन लोगों को फायदा होगा जिनके लिए 16 किलोमीटर ट्रैक करके मंदिर तक जाना मुश्किल होता है. पहाड़ों की मुश्किल यात्रा आने वाले सालों में काफी सुविधाजनक होने की उम्मीद है.

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Sonprayag To Kedarnath Ropeway (AI Image)

मुख्य बिंदु

  • सोनप्रयाग से केदारनाथ की यात्रा का समय घटकर 36-40 मिनट हो जाएगा.
  • सुरक्षित यात्रा के लिए रोपवे में एडवांस्ड 3S गोंडोला टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा.
  • इलाके के सटीक विश्लेषण और सुरक्षित निर्माण के लिए LiDAR मैपिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है.
  • PPP मॉडल के तहत इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग ₹4,081 करोड़ है.
  • इससे तीर्थयात्रा और पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

Sonprayag To Kedarnath Ropeway Project: केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक की यात्रा को पूरी तरह बदल देगा. पूरा होने पर, ये रोपवे सोनप्रयाग को केदारनाथ मंदिर से जोड़ेगा, जिससे हर साल उत्तराखंड आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए पहाड़ों की मुश्किल यात्रा बहुत तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी.

40 मिनट में पूरा होगा सफर

अभी तीर्थयात्री गौरीकुंड से तकरीबन 16 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं, जिसमें आमतौर पर 8 से 9 घंटे लगते हैं. आने वाला रोपवे इस यात्रा के समय को घटाकर लगभग 36-40 मिनट कर देगा, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अक्सर यह खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता मुश्किल लगता है.

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कैसे डेवलप होगा इंफ्रास्ट्रक्चर?

ये प्रोजेक्ट भारत सरकार के ‘पर्वतमाला नेशनल रोपवे डेवलपमेंट प्रोग्राम’ के तहत विकसित किया जा रहा है. ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, इंजीनियर पहाड़ी इलाके के हाई-रिजॉल्यूशन 3D मैप तैयार करने के लिए एडवांस्ड LiDAR टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे निर्माण से पहले ढलान, घाटियों, पथरीले हिस्सों और लैंडस्लाइड की आशंका वाले इलाकों की पहचान करने में मदद मिलती है.

इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

इस रोपवे में मॉडर्न ‘ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3S)’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा, जो तेज हवाओं और खराब मौसम में भी ज्यादा स्टेबिलिटी देती है. ये सिस्टम हर दिशा में प्रति घंटे तकरीबन 1,800 यात्रियों को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे भीड़-भाड़ वाले तीर्थयात्रा के मौसम में भीड़ को संभालने में काफी सुधार होगा.

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पीपीपी मॉडल

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत इस प्रोजेक्ट की कीमत तकरीबन 4,081 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. कनेक्टिविटी बेहतर होने के अलावा, इससे टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट, फूड सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर के मेंटनेंस में रोजगार के मौके पैदा होने की उम्मीद है, जिससे लोकल इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा.

कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?

उम्मीद है कि ये रोपवे 6 साल के अंदर बनकर तैयार हो जाएगा, जिसके बाद लंबे समय तक इसका संचालन होगा. ट्रैवल टाइम कम करने के साथ-साथ, इस प्रोजेक्ट का मकसद साल भर कनेक्टिविटी बनाए रखना, सस्टेनेबल टूरिज्म को बढ़ावा देना और मॉडर्न इंजीनियरिंग और कड़े सुरक्षा मानकों के जरिए हिमालय के नाजुक पर्यावरण को बचाना है. हर साल लगभग 20 लाख तीर्थयात्रियों के केदारनाथ आने के कारण, ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इस पवित्र तीर्थयात्रा के भविष्य को नई दिशा देने का वादा करता है.

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निष्कर्ष

केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट एक अहम पहल है जो आधुनिक तकनीक को आध्यात्मिक पर्यटन से जोड़ती है. ट्रैवल टाइम कम करके, सुरक्षा बढ़ाकर और आवा-जाही को आसान बनाकर, इससे हर साल लाखों तीर्थयात्रियों को फायदा होगा. उम्मीद है कि ये प्रोजेक्ट पर्यटन, रोजगार पैदा करने और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के जरिए उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखेगा.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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