देश की मशहूर निशानेबाज और ‘सांड की आंख’ फिल्म की असली प्रेरणा प्रकाशी तोमर की तबीयत अचानक बिगड़ गई है. शनिवार की रात घर का काम करते समय उनकी नाक की नस फट गई जिससे काफी खून बहने लगा और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर गईं. उनके बेटे रामबीर सिंह और अंतरराष्ट्रीय शूटर बेटी सीमा तोमर उन्हें तुरंत बागपत के बड़ौत स्थित एक निजी अस्पताल ले गए. वहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें घर लाया गया लेकिन रविवार सुबह दोबारा खून बहना शुरू हो गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया जिसके बाद फिलहाल नोएडा के एक बड़े अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है.
90 साल की उम्र और स्वास्थ्य चुनौतियां
करीब 90 साल की हो चुकीं प्रकाशी तोमर पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही हैं. इससे पहले साल 2023 में भी उन्हें सांस लेने में तकलीफ और ब्लड प्रेशर कम होने जैसी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. उस समय भी नोएडा के मेट्रो अस्पताल में उनका सफल इलाज हुआ था. परिवार के सदस्यों ने बताया कि अचानक नाक से खून बहने और बेहोशी आने के कारण वे काफी डरे हुए थे लेकिन अब विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है. उनके चाहने वाले और खेल जगत के लोग जल्द स्वस्थ होने की दुआएं कर रहे हैं.
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65 की उम्र में शुरू हुआ शूटिंग का सफर
प्रकाशी तोमर की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है क्योंकि उन्होंने निशानेबाजी जैसे खेल को तब अपनाया जब लोग रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं. 1937 में जन्मी प्रकाशी ने 65 साल की उम्र में पहली बार राइफल पकड़ी थी. दरअसल वह अपनी बेटी सीमा का हौसला बढ़ाने के लिए शूटिंग क्लब गई थीं जहां उन्होंने अनजाने में सटीक निशाना लगा दिया. उनके कोच ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें ट्रेनिंग देने का फैसला किया. परिवार और समाज के विरोध के डर से उन्होंने अपनी जेठानी चंद्रो तोमर के साथ छिपकर शूटिंग सीखी और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई.
राष्ट्रीय सम्मान और ‘सांड की आंख’ का संघर्ष
शूटर दादी के नाम से मशहूर प्रकाशी तोमर ने अपनी मेहनत से नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर 25 से ज्यादा मेडल जीते हैं. उनकी उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘आइकन लेडी’ और ‘100 वीमेन अचीवर्स’ जैसे बड़े सम्मानों से नवाजा है. राष्ट्रपति से भी उन्हें स्त्री शक्ति सम्मान मिल चुका है. साल 2019 में उनके और चंद्रो तोमर के संघर्ष पर आधारित ‘सांड की आंख’ फिल्म रिलीज हुई थी जिसमें तापसी पन्नू ने उनका किरदार निभाया था. आज वह लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और उनकी बहादुरी की कहानियां देश के हर कोने में सुनी जाती हैं.
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