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क्या गिरफ्तार होंगे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती? अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे शंकराचार्य

यौन उत्पीड़न मामले में फंसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है. उनके खिलाफ पोक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज है.

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न का मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया है. पहले गिरफ्तारी के लिए खुद को तैयार बताने वाले शंकराचार्य ने अब कानूनी राहत के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है. यह याचिका उनके अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के जरिए पेश की गई है. उम्मीद जताई जा रही है कि अदालत इस पर जल्द ही सुनवाई कर सकती है. इस कानूनी कदम को शंकराचार्य के पिछले रुख से बिल्कुल अलग देखा जा रहा है क्योंकि उन्होंने पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे पुलिस की कार्रवाई का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

यौन उत्पीड़न और पोक्सो एक्ट के तहत मामला

यह पूरा विवाद तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी के बाद शुरू हुआ है. उन्होंने जिला कोर्ट में अर्जी दाखिल कर गंभीर आरोप लगाए थे जिसके बाद एडीजे रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट ने झूंसी पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था. कोर्ट के कड़े रुख के बाद पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने यह मुकदमा बीएनएस की विभिन्न धाराओं और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने गहन विवेचना भी शुरू कर दी है.

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गिरफ्तारी की चर्चाओं के बीच बदला रुख

झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही शंकराचार्य की गिरफ्तारी की अटकलें तेज हो गई थीं. पुलिस की टीम मामले से जुड़े सबूत जुटाने और गवाहों के बयान दर्ज करने में जुटी हुई है. इसी बीच शंकराचार्य द्वारा अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चर्चा का विषय बन गया है. उनके समर्थकों का मानना है कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है वहीं विरोधियों का कहना है कि वे कानूनी शिकंजे से बचने की कोशिश कर रहे हैं. अब सबकी नजरें इलाहाबाद हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं जहां यह तय होगा कि उन्हें राहत मिलती है या उन्हें पुलिस की जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनना पड़ेगा.


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