संभल हिंसा पर न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में 24 नवंबर 2024 की घटना को सुनियोजित साजिश बताया गया है. आयोग के मुताबिक, मस्जिद सर्वे का विरोध सुनियोजित तरीके से किया गया था. भीड़ ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग की, कई वाहन फूंक दिए गए. हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और कई पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस ने आंसू गैस, रबर बुलेट और अन्य साधनों से हालात नियंत्रित किए. इस रिपोर्ट को बुधवार को यूपी विधानसभा में पेश किया गया है.

जांच आयोग ने क्या-क्या खंगाला?

जांच में पुलिस, प्रशासन, प्रत्यक्षदर्शियों, मीडिया, एफआईआर, पोस्टमार्टम, एफएसएल और बैलिस्टिक रिपोर्ट समेत सभी साक्ष्यों का अध्ययन किया गया. रिपोर्ट में संभल के सांप्रदायिक इतिहास का भी डिटेल से जिक्र किया गया है.

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कैसे भड़की थी हिंसा?

शाही जामा मस्जिद के एक अदालती आदेश के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़की थी. मस्जिद के बाहर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क गई. सर्वे को लेकर मुस्लिम समुदाय में गलत जानकारी फैलाई गई. हिंसा में चार युवकों की मौत हुई थी. आयोग ने बताया कि मृतकों को लगी गोलियां पुलिस की नहीं थीं. हिंसा में 28 पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए थे, जिनमें से सात को गोली लगी थी.

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किसने रची साजिश?

न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हिंसा पूर्व नियोजित साजिश का नतीजा थी. साथ ही सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और इंतेजामिया कमेटी की साजिश बताया गया है. जियाउर रहमान बर्क के अलावा सोहेल इकबाल, जफर अली कासिम सदर जामा मस्जिद, कासिम जमाल एडवोकेट, मसूद अली फारूकी एडवोकेट सचिव कमेटी, लड्डन खान उप सदर इंतजामिया कमेटी का भी इस हिंसा को भड़काने में हाथ बताया गया है.

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रिपोर्ट में जियाउर रहमान ने मस्जिद के बाहर मीडियाकर्मियों को संबोधित करने के नाम पर एकत्रित भीड़ को उत्तेजित भाषण दिया था. सपा सांसद ने भाषण दिया था.

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सर्वे करने गई टीम को इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारी से कड़ा विरोध का सामना करना पड़ा और लौटते समय उन्हें आक्रामक भीड़ का भी सामना करना पड़ा था.

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कौन-कौन थे जांच आयोग में?

24 नवंबर 2024 की हिंसा के चार दिन बाद, 28 नवंबर 2024 को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था. आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी.के. अरोड़ा ने की. रिटायर अमित मोहन प्रसाद और रिटायर आईपीएस अरविंद कुमार जैन आयोग के मेंबर बनाए गए थे. आयोग को घटना के कारणों, प्रशासन और पुलिस की भूमिका तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी.