'एक्स-मुस्लिम' आंदोलन से चर्चा में आए सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के बाद करीब एक महीने तक मौत से जंग लड़ने के बाद एक्स-मुस्लिम यूट्यूबर और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर सलीम वास्तिक को नई जिंदगी मिली है. 'सिर तन से जुदा' करने के इरादे से किए गए क्रूर हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद अब वे अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गए हैं. सुरक्षा कारणों और खतरे की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस ने सलीम वास्तिक को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा मुहैया करा दी है. दो पुलिसकर्मी उनके घर पर दिन-रात तैनात रहेंगे. सलीम के बेटे उस्मान अहमद ने बताया कि अभी वह पूरी तरह ठीक नहीं हुए हैं और ज्यादा बोल भी नहीं सकते. गले पर जख्म बहुत गंभीर था. पुलिस ने सुरक्षा दी है, इससे हमारा विश्वास बढ़ा है.
सलीम वास्तिक का संदेश
अस्पताल से लौटने के बाद सलीम वास्तिक ने लिखकर बताया कि "गला ही कटा है, जान तो नहीं गई. मैं डरा नहीं हूं, बल्कि पहले से ज्यादा मजबूत हो गया हूं. अब और बुलंद आवाज में कट्टरवाद का विरोध करूंगा." उन्होंने हमले के पीछे पाकिस्तान एंगल का भी जिक्र किया और कहा कि 15 दिन पहले से उन्हें धमकी मिल रही थी.
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क्या बोले एसीपी सिद्धार्थ गौतम?
एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि "वास्तिक घर वापस आ चुके हैं. पुलिस ने सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मियों को 24 घंटे की ड्यूटी पर तैनात किया है. वापसी के बाद पुलिस टीम ने घर का निरीक्षण किया और सुरक्षा दी गई. डीसीपी रुरल सुरेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि वास्तिक की सुरक्षा और संभावित खतरे को ध्यान में रखकर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. गौरतलब है कि सलीम वास्तिक पर हमले की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी, जिसके बाद 'राइट टू स्पीच' और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई थी. कई लोगों ने यूपी सरकार से मांग की थी कि वैचारिक मतभेद के कारण किसी की जान को खतरा नहीं होना चाहिए.
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हमले के बाद क्या हुआ?
27 फरवरी को गाजियाबाद के लोनी स्थित अपने दफ्तर में सलीम वास्तिक पर दो हमलावरों ने जानलेवा हमला किया था. हमलावरों ने उनके गले पर धारदार हथियार से वार किया और स्टूल से पीटा. सलीम लंबे समय तक दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती रहे, कई दिन वेंटिलेटर पर भी रहे. अब घर पहुंचने के बाद उनकी रिकवरी जारी है, लेकिन गले का घाव इतना गंभीर है कि पूरी तरह स्वस्थ होने में कई महीने लग सकते हैं. हमले में शामिल दोनों सगे भाई जीशान अली और गुलफाम अली पुलिस एनकाउंटर में ढेर हो गए.