उत्तर प्रदेश के अयोध्या में संतों ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया. संतों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी बैठक रोक दी और उन्हें बैठक स्थल से बाहर निकाल दिया. संतों के मुताबिक, वे कारसेवकपुरम के पास ओम आश्रम में बैठक कर रहे थे, तभी पुलिस वहां पहुंची और उन्हें परिसर से जाने को कहा तथा इसके बाद परिसर में ताला लगा दिया गया.
पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस ने इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. बैठक में शामिल संतों में से एक प्रकाशानंद गिरि उर्फ कंप्यूटर बाबा ने कहा कि संत समुदाय चढ़ावे की कथित चोरी की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करेगा. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर एक लाख संतों के साथ अयोध्या पहुंचकर आंदोलन किया जाएगा. अयोध्या के महंत जन्मेजय शरण ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में छोटे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई जबकि बड़े आरोपियों को बचाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया, ''राम मंदिर में चढ़ावे की लूट के मामले में छोटे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि बड़े आरोपियों को बचाया जा रहा है. जिला प्रशासन आरोपियों का पक्ष ले रहा है. वो नहीं चाहता कि आरोपी पकड़े जाएं, इसलिए संतों की बैठक नहीं होने दी जा रही है.''
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परमानंद गिरी ने क्या कहा?
महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने कहा कि संत समुदाय कथित चोरी को रोकने में नाकाम रहने के लिए माफी मांगता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता है. उन्होंने कहा, ''संत इस लूट को रोक नहीं पाए और इसके लिए हम हाथ जोड़कर रामलला से माफी मांगते हैं. आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाया जाना चाहिए.'' उन्होंने जांच के दौरान कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी में बड़ी भूमिका निभाने वाले लोगों की पहचान करने की भी मांग की.
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