गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने औद्योगिक इकाइयों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़े सुरक्षा व समन्वय की जरूरतों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाया है. कमिश्नरेट के तीनों जोनों में करीब 15,000 रजिस्टर्ड औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों के साथ-साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी शामिल हैं. इन सभी को मिलाकर जिले में दो लाख से अधिक कंपनियां सक्रिय हैं, जहां लगभग चार लाख श्रमिक कार्यरत हैं. ऐसे में इंडस्ट्रीज सेक्टर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों के लिहाज से बेहद अहम बन गया है.

इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने 'पुलिस उपायुक्त, इंडस्ट्रियल' (DCP Industrial) के पद का तदर्थ आधार पर गठन किया है. इस पद का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों, श्रमिक संगठनों और प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है. साथ ही, उद्योगों से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना और कानूनों का पालन करवाना भी इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी.

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पुलिस उपायुक्त, इंडस्ट्रियल के अधीन एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP Industries), तीन निरीक्षक और विभिन्न रैंक के 25 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे. यह टीम औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार संवाद बनाए रखेगी और श्रमिकों, उद्योगपतियों व संबंधित विभागों के साथ सीधे संपर्क में रहेगी. इससे किसी भी प्रकार के विवाद, शिकायत या सुरक्षा संबंधी मुद्दों का तेजी से निस्तारण संभव हो सकेगा.

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इस नई व्यवस्था के तहत इंडस्ट्रियल सेक्टर की समस्याओं की जानकारी संबंधित जोन की पुलिस को तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके. इसके अलावा, श्रमिकों और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर संभावित विवादों को शुरुआती स्तर पर ही सुलझाने की रणनीति पर काम किया जाएगा.

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इस प्रस्ताव को स्थायी रूप देने के लिए अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) और पुलिस उपायुक्त मुख्यालय को निर्देशित किया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ और गृह विभाग को भेजें. साथ ही, एक विस्तृत एसओपी भी तैयार कर लागू की जाएगी.

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अहम बात यह है कि यह इंडस्ट्रियल सेल तत्काल प्रभाव से कार्य करना शुरू कर देगा. इस पहल से न केवल औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि निवेश और रोजगार के माहौल को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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