नोएडा प्राधिकरण पिछले करीब 6 साल इंटरनेशनल गोल्फ कोर्स बनाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। जिसमें उनके सामने सबसे बड़ी समस्या जमीन की आ रही है। दरअसल प्राधिकरण को गोल्फ कोर्स के लिए जमीन नहीं मिल रही है। वैसे तो प्राधिकरण ने सेक्टर-151ए की करीब 2.22 हेक्टेयर जमीन को चिन्हित किया हुआ है, लेकिन इसमें भी दिक्कत आ रही है। प्राधिकरण का दावा है कि किसानों के साथ हुए समझौते के आधार पर जमीन नहीं मिली है।
जमीन अधिग्रहण के लिए शासन से अनुमति मांगी
नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन सेक्टर-151ए की करीब 2.22 हेक्टेयर जमीन के लिए अर्जेंसी क्लॉज का सहारा लेने की तैयारी कर रहा है। इसी जमीन के चलते गोल्फ कोर्स का काम अटका हुआ है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने अधिग्रहण के लिए शासन से अनुमति मांगी है। प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार पिछले काफी समय से काम शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन जमीन न मिलने पर सब ठप है। इसे लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारी बैठक भी कर चुके हैं। शासन को भी इससे अवगत करा दिया गया है। जल्द ही शासन से मंजूरी मिलने की संभावना है।
6 साल बाद भी किसानों से नहीं ले पाए जमीन
नोएडा इंटरनेशनल गोल्फ कोर्स का काम साल 2021 से चल रहा है। इसकी योजना करीब दो साल पहले तैयार की गई थी। ऐसे में खास बात यह है कि इस परियोजना के लिए 6 साल बाद भी नोएडा प्राधिकरण किसानों से जमीन नहीं ले पाया है। जिस जमीन पर गोल्फ कोर्स का मैदान बनेगा, उस जमीन पर प्राधिकरण का कब्जा नहीं है।
अधिग्रहण की चल रही है प्रक्रिया
प्रोजेक्ट के लिए कामबख्शपुर गांव की करीब 2.22 हेक्टेयर जमीन ली जानी है। खास बात यह है कि इसी जमीन पर गोल्फ कोर्स के लिए मैदान और अन्य निर्माण किए जाने हैं। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन के माध्यम से अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। जिला प्रशासन ने इस मामले में विभिन्न स्तरों पर कुछ प्रक्रिया पूरी कर ली है।
क्या है अर्जेंसी क्लॉज?
अर्जेंसी क्लॉज भूमि अधिग्रहण से संबंधित एक कानून है। इसके जरिए सरकार को सार्वजनिक उद्देश्य के लिए तत्काल और ज़रूरी आवश्यकता होने पर विस्तृत पूछताछ जैसे कुछ प्रक्रियात्मक कदमों को दरकिनार करने की अनुमति देता है। भूमि अधिग्रहण कानूनों में आमतौर पर पाया जाने वाला यह खंड, विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों में, भूमि के त्वरित अधिग्रहण को सक्षम बनाता है। उदाहरण के लिए, एक निर्माण अनुबंध में, तात्कालिकता खंड यह सुनिश्चित कर सकता है कि यदि कोई ठेकेदार काम में देरी करता है, तो संपत्ति का मालिक उस देरी से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकता है, जैसे कि किसी अन्य ठेकेदार को काम पर रखना।