Mulayam Singh Yadav: हरिद्वार के बाद अब प्रयागराज में नेताजी का अस्थि विसर्जन, अखिलेश के साथ रहे पत्नी और चाचा

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Mulayam Singh Yadav: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) मंगलवार को संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) के वीवीआईपी घाट पर अपने पिता और पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की अस्थियां विसर्जित (Asthi Visarjan) करने के लिए पहुंचे। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी डिंपल यादव (Dimple Yadav) और चाचा शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) भी मौजूद हैं।

निजी विमान से बमरौली एयरपोर्ट पहुंचे

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक अखिलेश यादव सुबह अपने पिता मुलायम सिंह यादव की अस्थियां लेकर सैफई हवाई पट्टी पर पहुंचे। जहां से अपने निजी विमान से पत्नी डिंपल यादव और चाचा शिवपाल यादव बमरौली एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी। बमरौली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद अखिलेश यादव यहां से सीधे संगम स्थित वीवीआईपी घाट पहुंचे। यहां पूजा अर्चना के बाद उन्होंने पुलिस स्टीमर से अपने पिता की अस्थियां संगम में विसर्जित कीं।

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कभी नेताजी ने जताई थी संगम की इच्छा

मीडिया रिपोर्ट्स और समाचार एजेंसियों के मुताबिक मुलायम सिंह यादव की इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को संगम में विसर्जित कर दिया जाए। इस दौरान डिंपल यादव और शिवपाल यादव समेत मुलायम सिंह यादव का पूरा परिवार मौजूद रहे। अस्थि विसर्जन के बाद 21 अक्टूबर को सैफई में ‘शांति पाठ’ का आयोजन किया जाएगा।

सैफई में तेरहवीं नहीं सिर्फ शांति पाठ होगा

जानकारी के मुताबिक हिंदू मान्यताओं के अनुसार तेरहवी का आयोजन होते है, लेकिन सैफई की परंपराएं अलग है। परंपरा के तहत मुलायम सिंह यादव की तेरहवीं नहीं की जाएगी। इस दिन सिर्फ ‘शांति पाठ’ होगा। बता दें कि समाजवादी पार्टी संस्थापक 82 वर्षीय मुलायम सिंह यादव का 10 अक्टूबर को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हुआ था। सुबह 8:16 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार 11 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे सैफई के मेला ग्राउंड में किया गया।

17 अक्टूबर को हरिद्वार में भी हुई था अस्थि विसर्जन

बता दें कि संगम से पहले हरिद्वार में भी मुलायम सिंह यादव की अस्थियां विसर्जित की गई थीं। यहां भी अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव, चाचा शिवपाल यादव समेत परिवार के काफी लोगों के साथ सैफई से जौली ग्रांट हवाई अड्डा पहुंचे थे। यहां से सभी लोग काफिले में सवार होकर सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुंचे थे। हरिद्वार के वीआईपी घाट पर पुरोहितों ने अनुष्ठान कराया था।

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