उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने बड़ा दांव खेला है. ब्राह्मण समुदाय को साधने की रणनीति के तहत मायावती ने पहला ब्राह्मण प्रत्याशी घोषित कर दिया है. जालौन जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट से आशीष पांडेय को प्रभारी बनाया है. बसपा की रणनीति के अनुसार, चुनाव घोषणा से पहले प्रभारी घोषित किए गए नेताओं को ही आमतौर पर अंतिम प्रत्याशी बनाया जाता है, इसलिए आशीष पांडेय को इस सीट से पार्टी का पहला ब्राह्मण चेहरा माना जा रहा है. यह घोषणा ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत है, क्योंकि पार्टी लगातार ब्राह्मणों के सम्मान और उनके साथ पुराने भाईचारे की बात कर रही है. ब्राह्मणों के समर्थन से बसपा 2007 के चुनाव में यूपी में अकेले प्रचंड बहुमत हासिल किया था.

ब्राह्मणों पर फोकस वाली रणनीति दोहरा रही बसपा

मायावती 2007 के सफल 'ब्राह्मण भाईचारा कमेटी' फॉर्मूले को फिर से अपनाती दिख रही हैं. उस समय ब्राह्मणों का खुला समर्थन मिलने से बसपा ने 403 में से 206 सीटें जीती थीं. अब पार्टी फिर से ब्राह्मणों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. हाल ही में मायावती ने वेब सीरीज 'घूसखोर पंडित' में ब्राह्मणों के अपमान से जुड़े मुद्दों पर खुलकर पक्ष लिया और सम्मान की बात की. उन्होंने कहा था कि ब्राह्मणों को 'बाटी-चोखा' नहीं, बल्कि सम्मान चाहिए. होली के बाद कानपुर मंडल की 5 और सीटों पर प्रभारियों की घोषणा होने वाली है, जिससे रणनीति और स्पष्ट होगी.

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ब्राह्मणों के सहारे कमबैक की कोशिश

बसपा वर्तमान में यूपी में सिर्फ बलिया की रसड़ा सीट पर काबिज है. 2027 में सत्ता वापसी के लिए मायावती ब्राह्मणों के सहारे 'हाथी का कमबैक' करने की कोशिश में जुटी हैं. यह कदम यूपी की जातीय सियासत में नया समीकरण बना सकता है, जहां ब्राह्मण वोट हमेशा से निर्णायक रहे हैं.

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