उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त भारी उत्सुकता का माहौल बन गया, जब ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार की गई बांग्लादेश की आधुनिक इंटरसिटी ट्रेनों के नए कोचों की एक खेप यहां से होकर गुजरी. रेलवे ट्रैक से गुजरते इन खूबसूरत और आधुनिक कोचों को देखने के लिए स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. ये सभी अत्याधुनिक एलएचबी (LHB) कोच पंजाब के कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में तैयार किए गए हैं. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए लगभग 915 करोड़ रुपये के करार के तहत कुल 200 आधुनिक यात्री कोचों की आपूर्ति की जा रही है. इसी समझौते के तहत तैयार कोचों की खेप को बांग्लादेश भेजा जा रहा है, जो रास्ते में शाहजहांपुर से होकर गुजरी.
कोचों में दी गई हैं ये खास सुविधाएं
बांग्लादेश रेलवे के लिए तैयार इस खेप में एसी स्लीपर, एसी चेयर कार और नॉन-एसी चेयर कार शामिल हैं. यात्रियों के सफर को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए इनमें विशेष सुविधाएं जोड़ी गई हैं.
- प्रार्थना कक्ष : लंबी दूरी के यात्रियों की सुविधा के लिए अलग से प्रार्थना कक्ष बनाया गया है.
- बेबी केयर रूम: छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाली माताओं के लिए विशेष बेबी केयर स्पेस की व्यवस्था है.
- सुरक्षा और तकनीक: सुरक्षा के लिहाज से पूरे कोच में सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति के लिए पैसेंजर अलार्म सिस्टम लगाया गया है.
कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री देश और विदेश दोनों के लिए आधुनिक तकनीक वाले कोच बनाने के लिए जानी जाती है. भारतीय पटरियों पर दौड़ने वाली कई प्रीमियम ट्रेनों के डिब्बे यहीं तैयार होते हैं, और अब भारत में बने ये कोच पड़ोसी देश बांग्लादेश की रेल सेवाओं को नई रफ्तार और आधुनिक रूप देंगे.
2024 में मिला था 200 कोचों का आर्डर
बांग्लादेश रेलवे ने साल 2024 में राइट्स (RITES) के जरिए इन 200 ब्रॉडगेज कोचों के निर्माण और आपूर्ति का आर्डर दिया था. ये सभी कोच सात अलग-अलग वेरिएंट में तैयार किए जा रहे हैं. इससे पहले वर्ष 2015-16 में भी कपूरथला से बांग्लादेश को 120 एलएचबी कोच सफलतापूर्वक भेजे गए थे. उसी भरोसे के दम पर यह नया समझौता हुआ है.
यूरोपीय सुरक्षा मानक और अलग बिजली व्यवस्था
यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कोचों को यूरोपीय मानक ईएन-15227 के क्रैश-रेजिस्टेंट डिजाइन के तहत बनाया गया है. इसके लिए पूरी बॉडी शेल में बदलाव किया गया है, ताकि किसी भी संभावित टक्कर में यात्रियों को नुकसान न पहुंचे. इसके अलावा, जहां भारतीय ट्रेनों में 750 वोल्ट की विद्युत प्रणाली होती है, वहीं बांग्लादेश की मांग के अनुसार इनमें 415 वोल्ट की विशेष विद्युत व्यवस्था की गई है.