हाथरस रेप केस में इलाहबाद हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने योगी सरकार को कहा है कि वो दलित पीड़ित परिवार को 3 महीने के अंदर मकान मुहैया कराए. अदालत ने कहा है कि परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में मकान उपलब्ध करवाया जाए, साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने के भी आदेश दिए हैं. दरअसल यूपी सरकार पीड़ित परिवार को अलीगढ़, कासगंज या एटा में घर देने पर अड़ी थी, लेकिन परिवार ने सुरक्षा कारणों से वहां रहने से इनकार किया था.

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हाई कोर्ट ने और क्या कहा?

इलाहबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार को खरी-खोटी सुनाई. अदालत ने सरकार के रवैये को अड़ियल बताया. कोर्ट ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता दी. कोर्ट ने कहा, इस फैसले में परिवार की गाजियाबाद या गौतमबुद्ध नगर में पुनर्वास की मांग का कोई जिक्र तक नहीं था, इसलिए इसे कानून की नजर में कोई फैसला नहीं माना जा सकता. 2020 में हाथरस में हुए रेप पीड़ित परिवार का कहना है कि 6 साल बाद भी उन्हें अब तक राहत नहीं मिल पाई है. अभी ये परिवार चंदपा क्षेत्र के बुलगढ़ी में रहता है.

क्या है मामला?

बता दें कि सितंबर 2020 में हाथरस जिले के एक गांव में 19 साल की दलित युवती के साथ दुष्कर्म किया गया था. उसे गंभीर रूप से घायल किया गया था. दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान 15 दिन बाद पीड़िता की मौत हो गई थी. इस मामले में गांव के चार ऊंची जाति के युवकों को आरोपी बनाया गया था. जुलाई 2022 में परिवार ने हाईकोर्ट को बताया था कि वो हाथरस में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे और नोएडा में बसना चाहते हैं. परिवार के एक सदस्य को नोएडा में सरकारी नौकरी देने की भी मांग की थी, जिसपर आज आखिरकार इलाहबाद कोर्ट ने फैसला सुनाया.

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