मुख्य बिंदु
- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 13 जुलाई, 2026 को खुलेगा.
- इससे दोनों शहरों के बीच ट्रैवल टाइम घटकर 45–60 मिनट रह जाएगा.
- 62.76 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को 4,700 करोड़ रुये की लागत से बनाया गया है.
- इसमें स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, ANPR, FASTag और इमरजेंसी सुविधाएं लगाई गई हैं.
- लखनऊ में एक नए फ्लाईओवर और कानपुर-कब्रई हाईवे प्रोजेक्ट की भी घोषणा की गई.
Lucknow-Kanpur Expressway To Open on July 13: जिस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का इंतेजार लंबे समय से था, वो 13 जुलाई, 2026 को आम जनता के लिए खुलने वाला है, जो उत्तर प्रदेश के ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ी अचीवमेंट होगी. उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शामिल होंगे.
कितनी है प्रोजेक्ट की लागत?
तकरीबन 5 सालों में बने इस 62.76 किलोमीटर लंबे 6-लेन एक्सप्रेसवे को 4,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया गया है; भविष्य में इसे 8-लेन तक बढ़ाया जा सकता है. इस प्रोजेक्ट में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों तरह के अलाइनमेंट शामिल हैं, जिसमें लखनऊ से गुजरने वाला 18 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा भी है. ये रूट लखनऊ में अमौसी के पास शुरू होता है और कानपुर में शुक्लागंज पर खत्म होता है.
गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी
एक बार चालू हो जाने पर, इस एक्सप्रेसवे से लखनऊ और कानपुर के बीच ट्रैवल टाइम 1.5 से 2.5 घंटे से घटकर 45-60 मिनट रह जाने की उम्मीद है. इस रूट पर नवाबगंज, बंथरा, बनी और उन्नाव जैसे अहम जंक्शन हैं, साथ ही एक रैंप इसे आने वाले गंगा एक्सप्रेसवे से भी जोड़ेगा.
मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस
इस कॉरिडोर में 3 बड़े पुल, 28 छोटे पुल, 38 अंडरपास, 6 फ्लाईओवर और 2 इंटरचेंज शामिल हैं. इसे मॉडर्न इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से भी लैस किया गया है, जिसमें 80 से ज्यादा सर्विलांस कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, स्पीड रडार, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम और वेरिएबल मैसेज साइन शामिल हैं. उम्मीद है कि इमरजेंसी सेवाएं एक्सप्रेसवे पर किसी भी जगह लगभग 10 मिनट के भीतर पहुंच सकेंगी.
ऑटोमेटिक टोल कलेक्शन
एक्सप्रेसवे पर आसानी से टोल कलेक्शन के लिए FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा. 4 टोल प्लाजा चालू होंगे, जिनमें कारों के लिए एक तरफ का टोल लगभग 275 रुपये होगा, जबकि 24 घंटे के भीतर वापसी की यात्रा का खर्च लगभग 415 रुपये हो सकता है. टोल की अंतिम दरें आम जनता के लिए खुलने से पहले घोषित की जाएंगी.
4-लेन फ्लाईओवर का होगा शिलान्यास
उद्घाटन के दौरान, शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर 108 करोड़ रुपये की लागत वाले 4-लेन फ्लाईओवर की आधारशिला भी रखी जाएगी. इसके अलावा, केंद्र ने 123 किलोमीटर लंबे कानपुर-कब्रई ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी दी है. 7,145 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट से पूरे बुंदेलखंड में कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है. बेहतर सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर से लखनऊ, उन्नाव और कानपुर में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
निष्कर्ष
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में एक अहम कदम है. यात्रा का समय कम करने के साथ-साथ, ये प्रोजेक्ट एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट, बेहतर सड़क सुरक्षा और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी लाता है. लोगों और सामान की तेजी से आवाजाही में मदद करने के साथ-साथ, इस एक्सप्रेसवे से लखनऊ, उन्नाव और कानपुर में इंडस्ट्रियल ग्रोथ, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इस कॉरिडोर से जुड़े भविष्य के हाईवे प्रोजेक्ट्स से भी सेंट्रल यूपी में आर्थिक विकास मजबूत होने की संभावना है.