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पटना-चंडीगढ़ में चले वाटर कैनन, असम में गौरव गोगोई हिरासत में… ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस ने देशभर में खोला मोर्चा. Credit: ANI
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चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी बर्खास्तगी की मांग को लेकर शुक्रवार को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया. राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों तक सड़कों पर भारी हंगामा देखने को मिला. गुवाहाटी में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. वहीं, पटना और चंडीगढ़ में हालात बेकाबू होते देख पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा.

नई दिल्ली में निर्वाचन सदन और जंतर-मंतर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जहां भारतीय युवा कांग्रेस और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की. इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी प्रदर्शन हुए.

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लखनऊ में भारी बारिश के बीच कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

लखनऊ में भारी बारिश के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने में नाकाम रहने और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए.राजेंद्र पाल गौतम ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “यह महज आरोप नहीं है, अपराध साबित हो चुका है. उन्होंने देशद्रोह किया है. संविधान ने उन्हें निष्पक्ष चुनाव की जिम्मेदारी दी थी और उन्हें जो ताकत मिली है, वह देश के संविधान से मिली है, भाजपा से नहीं.” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है.

राहुल गांधी द्वारा उठाए सवालों का दिया हवाला

राजेंद्र पाल गौतम ने केंद्र सरकार पर चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया. गौतम ने दावा किया कि केंद्र के संरक्षण की वजह से वोटों को हटाने या चुनावी नतीजों को प्रभावित करने जैसी आशंकाएं पैदा हो रही हैं. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए सवालों का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी ने पूरे तथ्यों और सबूतों के साथ आयोग की कार्यशैली को उजागर किया है

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विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद भड़का, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और डेटाबेस तक पहुंच जैसे गंभीर विषय शामिल थे. इस खुलासे के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि हालिया चुनावों में धांधली की गई. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और वोट पर हमला करने वाला आचरण अस्वीकार्य है.

चुनाव आयोग का पक्ष

बढ़ते विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. आयोग का कहना है कि किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में सुझाव और प्रशासनिक फीडबैक आना एक सामान्य प्रक्रिया है. आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित सभी अंतिम निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मति से ही लिए गए थे.

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