'ज्ञानेश कुमार देश के सबसे बड़े गद्दार', SIR विवाद पर भड़के अभिजीत दीपके, मांगा CEC का इस्तीफा

Abhijeet Dipke Press Conference: अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्हें चीफ इलेक्शन कमिशनर ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा और उन्हें भारत का सबसे बड़ा गद्दार करार दिया, साथ ही उनके इस्तीफे की भी मांग की.

Gyanesh Kumar Abhijeet Dipke PTI

ज्ञानेश कुमार और अभिजीत दीपके (Photo-PTI)

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Abhijeet Dipke Slam Gyanesh Kumar: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने गुरुवार को चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर चल रहे विवाद के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. दीपके ने सवाल उठाया कि क्या इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाना डेमोक्रेटिक सिद्धांतों के हिसाब से सही है और आरोप लगाया कि इस काम से देश के इलेक्शन प्रोसेस पर असर पड़ सकता है.

इलेक्टोरल रोल रिवीजन पर आरोप

दीपके के मुताबिक 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं, जो उनके दावे के मुताबिक कुल वोटर्स का लगभग 13-14 परसेंट है. उन्होंने कथित तौर पर नाम हटाने के पीछे के कारणों पर सवाल उठाया और कहा कि इस काम से रूलिंग पार्टी और अपोजिशन के बीच पॉलिटिकल बैलेंस पर असर पड़ सकता है. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया और सवाल किया कि क्या कथित तौर पर नाम हटाने का मकसद दोनों पक्षों के बीच वोटों के कम अंतर को बढ़ाना था.

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सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस (Photo-PTI)

विपक्षी नेताओं के चुनाव क्षेत्रों के बारे में दावे

दीपके ने आगे आरोप लगाया कि बड़े विपक्षी नेताओं से जुड़े चुनाव क्षेत्रों से बड़ी तादाद में वोटरों के नाम हटाए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के चुनाव क्षेत्र से करीब 50000 वोटरों के नाम हटाए गए, जबकि तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के चुनाव क्षेत्र से कथित तौर पर 1 लाख नाम हटाए गए. उन्होंने ये भी दावा किया कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र से करीब 40000 वोटरों के नाम हटाए गए. दीपके के मुताबिक इन चुनाव क्षेत्रों में कथित तौर पर वोटरों के नाम हटाए जाने के बाद या तो चुनाव में हार हुई या बहुत कम अंतर से जीत मिली. उन्होंने तर्क दिया कि ये चीजें अलग-अलग घटनाओं के बजाय एक संभावित पैटर्न की तरफ इशारा करते हैं.

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों पर सवाल

दीपके ने ये भी आरोप लगाया कि केरल में वोटरों के नाम हटाए जाने से सीएम पिनाराई विजयन की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ा. उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्षी नेताओं से जुड़े क्षेत्रों से वोटर्स को हटाने से राजनीतिक मुकाबला कमजोर हो सकता है. सीजेपी के फाउंडर्स ने तर्क दिया कि लोकतंत्र के लिए सार्थक चुनावी मुकाबला जरूरी है और सवाल किया कि अगर विपक्ष को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जाए तो क्या चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष माना जा सकता है? उनका ये कमेंट एसआईआर एक्सरसाइज और इलेक्टोरल रोल से जुड़े आरोपों को लेकर चल रहे बड़े राजनीतिक विवाद के बीच की गई थी.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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