उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने लंबे समय से कोई बड़ी जिम्मेदारी न मिलने और खाली बैठने के कारण सेवा से 'तकनीकी' रूप से इस्तीफा दे दिया है. रिंकू राही ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग की है कि उन्हें वापस उनके मूल प्रान्तीय लोक सेवा (पीसीएस) संवर्ग में भेज दिया जाए. उनका कहना है कि पिछले आठ महीनों से उनके पास कोई निर्धारित काम नहीं है और बिना किसी जिम्मेदारी के सिर्फ वेतन और भत्ते लेना उन्हें नैतिक रूप से सही नहीं लगता. राही ने साफ किया कि वह प्रशासनिक व्यवस्था नहीं छोड़ रहे हैं बल्कि गरिमा के साथ काम करने का अवसर चाहते हैं.
पारदर्शिता की कोशिशों के बीच किनारे किए जाने का आरोप
रिंकू सिंह राही ने अपनी शिकायत में कहा है कि जुलाई 2025 में शाहजहांपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने व्यवस्था में सुधार के कुछ कदम उठाए थे. उनका दावा है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें सक्रिय दायित्वों से दूर कर दिया गया. राही का मानना है कि संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा और जवाबदेही के साथ काम करने का तरीका मौजूदा व्यवस्था में उन्हें 'अनुपयुक्त' महसूस कराता है. उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से बातचीत में जोर देकर कहा कि वह किसी निजी परेशानी या अवसाद में नहीं हैं बल्कि सबसे बुरे हालातों का सामना पहले ही कर चुके हैं.
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जानलेवा हमले और घोटालों के खुलासे का पुराना इतिहास
रिंकू राही का करियर विवादों और संघर्षों से भरा रहा है. जब वह मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी थे तब उन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का पर्दाफाश किया था. इस बहादुरी की कीमत उन्हें अपनी जान पर खेलकर चुकानी पड़ी जब उन पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें गंभीर चोटें आईं. राही ने आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी भ्रष्ट तत्वों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और उल्टा उन्हें ही मानसिक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2023 में यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास कर आईएएस बनकर सबको चौंका दिया था.
अलीगढ़ में परिवार की भावुक अपील
अलीगढ़ में रहने वाले रिंकू सिंह राही के पिता सौदान सिंह और चाचा रघुवीर सिंह ने सरकार और उच्च अधिकारियों से सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की है. परिवार का कहना है कि रिंकू ने पूरी तरह इस्तीफा नहीं दिया है बल्कि वह सिर्फ काम करने का हक मांग रहे हैं. उनके पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उनके बेटे को ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने का एक मौका दिया जाना चाहिए. परिवार के मुताबिक रिंकू को दरकिनार करने के बजाय उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप सार्थक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए ताकि वे समाज की सेवा कर सकें. राही पहले भी शाहजहांपुर में एक विवाद के बाद खुद उठक-बैठक करने को लेकर सुर्खियों में रहे थे.