ग्रेटर नोएडा में फूटा किसानों का गुस्सा, आबादी भूखंड न मिलने पर दी भूख हड़ताल की चेतावनी

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्षों पहले अधिग्रहित की गई जमीन के एवज में अभी तक आबादी भूखंड न मिलने से नाराज किसानों का आक्रोश मंगलवार को एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। जुनपत, पाली, मायचा, घंघौला सहित कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में प्राधिकरण मुख्यालय पहुंचे।

Farmers Protest
विज्ञापन

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा वर्षों पहले अधिग्रहित की गई जमीन के एवज में अभी तक आबादी भूखंड न मिलने से नाराज किसानों का आक्रोश मंगलवार को एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। जुनपत, पाली, मायचा, घंघौला सहित कई गांवों के किसान बड़ी संख्या में प्राधिकरण मुख्यालय पहुंचे और अपनी नाराजगी जताते हुए प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही भूखंड नहीं दिए गए तो वह भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। किसानों ने ऐलान किया है कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

10 प्रतिशत आबादी भूखंड का वादा अधूरा
किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान प्राधिकरण ने विकास कार्यों में सहयोग के बदले उन्हें 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने का वादा किया था। लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद अधिकांश किसानों को अभी तक उनका हक नहीं मिला है। जिन किसानों को भूखंड दिए गए है उनमें से कई को केवल 6 प्रतिशत भूखंड ही मिले है। बाकी के 4 प्रतिशत भूखंड अब तक लंबित हैं।

Advertisment

पूर्व चेयरमैन के समझौते का हवाला
किसानों ने इस संबंध में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) मुकेश कुमार सिंह को प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि पूर्व चेयरमैन रमा रमन के कार्यकाल में किसान संगठनों से यह स्पष्ट समझौता हुआ था कि वह विकास कार्यों में कोई बाधा नहीं डालेंगे। इसके बदले उन्हें उचित मुआवजा एवं आबादी भूखंड दिए जाएंगे। अब तक यह समझौता पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

किसानों की दो टूक
विरोध कर रहे किसानों ने एक स्वर में कहा कि वह अब और प्रतीक्षा नहीं कर सकते। यदि शीघ्र ही भूखंड नहीं दिए गए तो आंदोलन तेज किया जाएगा। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि इस बार आंदोलन केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक जाएगा।

विज्ञापन

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

First published on:

Read more: About our editorial guidelines and standards here.

लेख समाप्त
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ