बुधवार देर रात को दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक AC स्लीपर बस में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई. ये हादसा तब हुआ, जब बस जेवर के पास यमुना एक्स्प्रेसवे के पास थी. इस दुर्घटना के वक्त बस में 35 लोग सवार थे, जिनमें से 9 की मौत हो गई. बस में 28 साल के शशांक गुप्ता भी अपनी मां के साथ मौजूद थे, जिनकी मौत हो गई. हादसे में बचने वालों में दो ड्राइवर्स, कंडक्टर और 26 यात्री थे. ड्राइवर ने बताया कि आखिरी बार शशांक ने उनसे कहा था कि वो बस से तभी उतरेंगे, जब उनकी मां बाहर आ जाएंगी. लेकिन अफसोस ये है कि मां और बेटा दोनों ही उस जलती हुई बस से बाहर नहीं आ सके.
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मां-बेटे के शव बरामद
शुक्रवार को आग में बुरी तरह झुलसे शशांक गुप्ता और उनकी मां सुनीता गुप्ता के शवों की पहचान की गई. परिवार वालों ने सुनीता गुप्ता की पहचान उनकी लंबाई से और शशांक गुप्ता की पहचान उनकी अंगूठी से की. दरअसल, दोनों मां-बेटे का साथ में ट्रैवल करने का कोई प्लान नहीं था. महोबा के चरखारी की रहने वाली सुनीता गुप्ता के घुटने में लंबे वक्त से दर्द था, जिसका इलाज वो एक महीने से गुरुग्राम में अपने बेटे शशांक के पास रहकर करा रही थीं. घुटने में दर्द की वजह से वो ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही थीं.
बस में क्यों कर रहे थे सफर?
चरखारी में शशांक गुप्ता के चाचा को हार्ट अटैक आया, जिसके बाद दोनों को घर लौटना था. उन्होंने ट्रेन की टिकट के लिए काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन नहीं मिली. मजबूरन उन्हें राज कल्पना ट्रैवल्स की स्लीपर बस में पीछे की सीटें बुक करवाईं. परिवार के मुताबिक, बस में आग लगने से पहले ही यात्रियों को बस के अंदर कुछ जलने की गंध महसूस हुई थी. शशांक के पिता ने बताया कि यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को इस बात की जानकारी भी दी थी, लेकिन बस नहीं रोकी गई. बस में मौजूद कुछ यात्रियों का ये भी आरोप है कि ड्राइवर और कंडक्टर केबिन में स्मोकिंग भी कर रहे थे. आग फैलने के बाद बस में धुआं भर गया, यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए बस के शीशे तोड़कर बाहर कूद गए, लेकिन फिर भी 9 लोगों की जान नहीं बच पाई.