Namo Bharat Train UP: उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए परिवहन के क्षेत्र से एक बेहद शानदार और बड़ी खुशखबरी सामने आई है. दिल्ली-एनसीआर की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश में भी हाई-स्पीड 'नमो भारत' रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी आरआरटीएस चलाने की एक महायोजना तैयार की गई है. इस बेहद आधुनिक प्रोजेक्ट के तहत राज्य के छह प्रमुख जिलों लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, बाराबंकी, रायबरेली और अयोध्या को आपस में जोड़ा जाएगा. इस बड़े कदम से उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन यानी राज्य राजधानी क्षेत्र के तहत आने वाले इन महत्वपूर्ण शहरों के बीच सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी जिससे उनका रोजाना का सफर काफी आसान हो जाएगा.
जानिए क्या है पूरा रूट प्लान और पहला चरण?
इस पूरी योजना को धरातल पर उतारने के लिए 14 मई को नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. इस बैठक में कॉरिडोर के निर्माण को लेकर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन पर चर्चा की गई है जिससे साफ है कि यह प्रोजेक्ट अब तेजी से आकार ले रहा है. इस प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 187 किलोमीटर तय की गई है. इसके पहले चरण के तहत नयागंज से अमौसी तक 67 किलोमीटर लंबे हिस्से का विकास किया जाएगा. इसके बाद दूसरे चरण में इस रेल नेटवर्क का विस्तार अमौसी से लेकर सीधे प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या तक किया जाएगा.
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घंटों का सफर अब मिनटों में होगा पूरा
इस नमो भारत रैपिड रेल प्रोजेक्ट के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश के दो बड़े धार्मिक और औद्योगिक केंद्रों यानी कानपुर और अयोध्या के बीच की दूरी बेहद कम समय में तय की जा सकेगी. वर्तमान में इन दोनों शहरों के बीच का सफर तय करने में लोगों को कई घंटे लग जाते हैं, लेकिन इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने के बाद कानपुर से अयोध्या का सफर महज 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे में पूरा हो जाएगा. लगभग 32,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम अनुमानित लागत से तैयार होने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य एनसीआरटीसी और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर संयुक्त रूप से करने जा रही हैं.
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लखनऊ बनेगा सबसे बड़ा हब और बढ़ेंगे रोजगार
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को सबसे बड़े इंटरचेंज हब के रूप में विकसित किया जाएगा जो कानपुर, बाराबंकी और अयोध्या के रूटों को आपस में जोड़ेगा. अधिकारियों का मानना है कि इस रैपिड रेल कॉरिडोर के शुरू होने से न केवल आम जनता की यात्रा सुगम होगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार मिलेगी. इसके साथ ही एक्सप्रेसवे और पुराने रास्तों के किनारे नए आवासीय क्षेत्रों का विकास तेजी से होगा. इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए राज्य में व्यापार, निवेश और स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे जिससे उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी.
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