खबर की मुख्य बातें:-

  • नई परियोजना के अनुसार, 380 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे गाजियाबाद को कानपुर से जोड़ेगा, जिससे यात्रा का समय 8-9 घंटे से घटकर लगभग 5-6 घंटे की रह जाएगी.
  • एक्सप्रेसवे 9 जिलों (गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फर्रुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव और कानपुर) से होकर गुजरेगा और भविष्य में इसे 4 लेन से 6 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र में विकास तेजी से हो सकेगी.
  • परियोजना का करीब 90% भूमि अधिग्रहण पूरा बताया जा रहा है. इसे भारतमाला परियोजना के तहत NHAI विकसित कर रहा है और लक्ष्य 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक पूरा करने का है.

देशभर में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है. इन्हीं में शामिल है गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे (Ghaziabad-Kanpur Expressway), जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को कानपुर से जोड़ने का काम करेगा. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तौर पर किया जाएगा, यानी यह बिलकुल नया बनकर नए रूट के साथ तैयार किया जाएगा. इसमें सबसे खास बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण होगा, जिससे यहां रहने वाले लोगों को उनकी जमीन की अच्छी कीमत मिलेगी. माना जा रहा है कि बीते कई वक्त से इस मार्ग की मांग देखी गई थी. रिपोर्ट बताते हैं कि इस एक्सप्रेसवे पर 4 लेन बनाएं जाएंगे, जिसकी लंबाई 380 किलोमीटर तक होगी, हालांकि, बाद में इसे 6 लेन का किया जा सकता है.

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सफर होगा पहले कई गुना ज्यादा सुगम

इस नए महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तैयार होने से न सिर्फ गाजियाबाद से बल्कि नोएडा और दिल्ली से कानपुर और आसपास के जिलों की यात्रा काफी आसान हो जाएगी. माना जा रहा है वर्तमान में जहां भारी ट्रैफिक के कारण सफर का समय बढ़ जाता है और सफर थकाऊ हो जाता है, इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने से इस समस्या से मुक्ति मिलेगी और थकाऊ सफर काफी आसान हो जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, तैयार हो रहा नया एक्सप्रेसवे 9 जिलों से होकर गुजरेगा, यानी इस एक्सप्रेसवे से 9 जिलों के लिए यात्रा पहले से कई गुना आसान और सुगम हो जाएगी.

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इसके अलावा हापुड़ से 60 किलोमीटर की एक कनेक्टिंग लिंक मार्ग भी तैयार किया जा रहा है, जो इस दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और NH 9 से सीधा जोड़ने का काम करेगा. यानी इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होते ही लोगों आसानी से यूपी और अन्य जगहों की यात्रा कर सकेंगे. बता दें कि इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भारतमाला परियोजना के तहत नेशनल ग्रीन हाईवे मिशन के तौर पर इसका निर्माण कर रहा है.

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विवरणजानकारी
परियोजना का नामगाजियाबाद–कानपुर एक्सप्रेसवे
कुल लंबाई380 किलोमीटर (ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे)
कितने होंगे लेन4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे (भविष्य में 6 लेन तक विस्तार योग्य)
अनुमानित लागत₹15,000 करोड़
कार्यकारी प्राधिकरणभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
कब होगा शुरू2026 के अंत से 2027 की शुरुआत तक (अनुमानित)

क्या रहेगा गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे का रूट?

गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे की मदद से लोग कई जिलों व शहरों से होकर गुजरेंगे, जिससे रूट पर पड़ने वाले इलाकों में विकास, व्यापार को काफी बढ़ावा मिलेगी और नौकरी के अवसर भी पैदा होंगे. आज जहां मौजूदा रूट में भारी ट्रैफिक के कारण लोग ट्रेन आदि का सहारा लेते हैं, इस एक्सप्रेसवे के बाद इन जगहों का सफर बहुत आसान और तेज हो सकेगा. इस एक्सप्रसवे से कुल 9 जिलों को जोड़ा जाएगा, जिसमें;

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  1. गाजियाबाद (NH 9 के पास)
  2. हापुड़
  3. बुलंदशहर
  4. अलीगढ़
  5. कासगंज
  6. फर्रुखाबाद
  7. कन्नौज
  8. उन्नाव
  9. कानपुर का नाम शामिल है.

लंबे सफर की होगी छुट्टी, सिर्फ 5 घंटे में गाजियाबाद से कानपुर

वाहनों से गाजियाबाद से कानपुर के रूट में सफर करना आसान नहीं है, इसके लिए वर्तमान में काफी लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है, जिससे न सिर्फ ईंधन की खपत बढ़ती है और समय भी काफी बर्बाद होता है. अभी वाहन चालकों को NH 9 या फिर यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लंबा रूट का सहारा लेना पड़ता है और अच्छा खासा घूमकर जाना पड़ता है, जिसमें 8-9 घंटे का लंबा समय बीत जाता है. लेकिन नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यात्रा का समय कटकर सिर्फ 5 से 6 घंटे का रह जाएगा, जबकि वाहन चालकों को बड़ी राहत देने का काम करेगी.

कहां से होगा शुरू: गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे की शुरुआत गाजियाबाद में NH-9 के पास से होगी. यहां से हापुड़ से करीब 60 किलोमीटर लंबी कनेक्टिंग रोड इसे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर और पूर्वी दिल्ली के यात्रियों को एक्सप्रेसवे पर तेज और आसान पहुंच मिलेगी.

जेवर एयरपोर्ट से सीधा कनेक्शन: इस एक्सप्रेसवे को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से जोड़ने के लिए भी एक समर्पित लिंक रोड भी प्रस्तावित है. इससे पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को एयर कार्गो सुविधाओं तक तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे माल परिवहन में समय और लागत दोनों की बचत होगी.

दक्षिणी छोर: एक्सप्रेसवे का आखिरी छोर कानपुर-उन्नाव क्षेत्र के पास होगा, जहां इसे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा. इससे कानपुर, लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों के बीच यात्रा पहले से ज्यादा तेज, सुगम और निर्बाध हो जाएगी.

इन इलाकों को भी फायदा:  इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से कासगंज, फर्रुखाबाद और कन्नौज में रहने वाले लोगों को भी फायदा मिलेगा. इन जगहों से आने वाला अवाज और उद्योगों को निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

रियल एस्टेट के नजर से भी फायदेमंद एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट

इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट को रियल एस्टेट के नजरिये से देखें, तो यह रूट पर पड़ने वाले जिलों, शहरों व गांवों की किस्मत चमकाने का काम करेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम 90 फीसदी पूरा हो चुका है, जिसमें लोगों को अच्छे रेट पर उनकी जमीन का दाम दिया जा रहा है. अब जब यह एक्सप्रेसवे तैयार हो जाएगा, तो इसके आसपास, कई महत्वपूर्ण विकास होगा, जिसमें टाउनशिप, हाउसिंग सोसायटी आदि प्रोजेक्ट शामिल है.

यानी कुल मिलाकर बात इतनी है कि इस एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के पूरा होने से न सिर्फ वाहन चालकों को फायदा मिलेगा, बल्कि रूट के आसपास रहने वाले लोगों को भी इसका बहुत बड़ा फायदा हासिल होगा. हालांकि, सवाल उठता है कि आखिर यह एक्सप्रेसवे कब खुलेगा, तो रिपोर्ट बताती है कि इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य समय सीमा 2026 के अंत या फिर 2027 के शुरुआत तक रखा गया है. यानी साफ है कि इस प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है.

मुख्य निष्कर्ष:- गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने का काम करेगा. इसके शुरू होने से यात्रा तेज होगी, उद्योग और रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही, मार्ग से जुड़े जिलों के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की भी उम्मीद है.

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