राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में FIR दर्ज कराई गई है. हैरानी की बात तो ये है कि SIT जांच के बाद ट्रस्ट ने खुद ये रिपोर्ट लिखवाई है. हालांकि एफआईआर किसके खिलाफ दर्ज कराई गई है, अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है. जानकारी के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी तरफ से यह FIR लिखवाई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद अयोध्या पुलिस ने राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी के संबंध में छह से आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यह कदम तब उठाया गया जब राज्य सरकार के निर्देश पर मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी.
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BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज
पुलिस सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के सदस्य श्रीकृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर अयोध्या थाने में एफआईआर दर्ज किया गया. शिकायत में मंदिर के चढ़ावे के कथित रूप से गायब होने और उनसे सम्बन्धित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं. एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया गया है.
SIT ने सौंपी अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट
वहीं, चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट हाल ही में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य सचिव (होम) संजय प्रसाद को सौंप दी है. संजय प्रसाद ट्रस्ट के पदेन सदस्य भी हैं. सूत्रों के अनुसार, SIT की पूछताछ में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय सहित कई व्यक्तियों से भी बातचीत हुई. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि दर्ज की गई एफआईआर किसके खिलाफ दर्ज की गई है और उन पर कौन-कौन से आरोप लगाए गए हैं.
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सुप्रीम कोर्ट में 29 को होगी सुनवाई
सर्वोच्च न्यायालय ने एक याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह 29 जून को अयोध्या के राम मंदिर को मिले दानों के कथित गबन से जुड़े मामले में FIR दर्ज करने और निष्पक्ष, समयबद्ध जांच की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करें. यह याचिका वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई है.
याचिका में कहा गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय व प्रशासनिक मामलों की जांच के लिए CBI की अगुवाई में एक SIT गठित की जाए. याचिकाकर्ताओं ने दान राशि के कथित दुरुपयोग और गबन के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी. वी. नागरथना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिकाकर्ता की तुरंत सुनवाई की मांग पर कहा कि यह मामला 29 जून को मेंशन किया जाए.
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