रातों-रात अमीर बनने का लालच इंसान को किस हद तक बर्बाद कर सकता है इसका ताजा और चौंकाने वाला मामला उत्तराखंड से सामने आया है. हरिद्वार के झबरेड़ा इलाके के रहने वाले महज 18 साल के एक युवक ने ऑनलाइन गेमिंग के चंगुल में फंसकर अपने पिता की मेहनत की गाढ़ी कमाई के 1.77 करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए. बीसीए की पढ़ाई कर रहे अभिमन्यु नाम के इस छात्र ने पहले स्पोर्ट्स बाजी और ड्रीम 11 जैसे ऐप पर हाथ आजमाया और बाद में विदेशी ठगों के 'विन अड्डा' जैसे फर्जी लिंक के झांसे में आ गया. ठगों ने उसे कम पैसे लगाकर दोगुना मुनाफा कमाने का लालच दिया और शुरुआत में छोटा फायदा दिखाकर उसका भरोसा जीत लिया.
करोड़ों की ठगी और पांच बैंक खाते
हैरानी की बात यह है कि युवक ने एक साल के भीतर अपने और अपने पिता के पांच अलग-अलग बैंक खातों से यह भारी-भरकम रकम ठगों को ट्रांसफर कर दी. ये पैसे पीड़ित किसान को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे के तौर पर मिले थे. युवक ने पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के खातों का इस्तेमाल कर यूपीआई के जरिए किस्तों में 1.77 करोड़ रुपये जालसाजों के हवाले कर दिए. जब उसने अपना मुनाफा और मूल रकम वापस मांगी, तो ठगों ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया और उसे धमकाना शुरू कर दिया.
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ठगी के बाद जहर खाकर जान देने की कोशिश
पूरी रकम डूबने और ठगे जाने का एहसास होने पर युवक बुरी तरह टूट गया और उसने खौफनाक कदम उठाते हुए जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी की कोशिश की. किस्मत अच्छी थी कि समय रहते उसे अस्पताल पहुंचा दिया गया और उसकी जान बच गई. युवक इस कदर कर्ज और मानसिक दबाव में था कि उसने वह मोबाइल फोन भी बेच दिया जिससे वह पैसे ट्रांसफर करता था. किसान पिता को जब इस भयानक धोखे का पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. अब देहरादून के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
विदेशी नंबरों से बुना गया था साजिश का ताना-बना
जांच में सामने आया है कि ठगी के लिए +237, +234 और +94 जैसे विदेशी कोड वाले नंबरों का इस्तेमाल किया गया था. साइबर पुलिस के एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि युवक को व्हाट्सऐप पर वीआईपी लिंक भेजकर फंसाया गया था. एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन गेमिंग और अज्ञात लिंक पर क्लिक करना कितना खतरनाक हो सकता है. यह मामला उन युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में साइबर अपराधियों के आसान शिकार बन जाते हैं. फिलहाल पुलिस उन बैंक खातों को ट्रेस करने में जुटी है जिनमें करोड़ों की यह रकम ट्रांसफर की गई है.