मुख्य जानकारियां:
- दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जेवर एयरपोर्ट से होकर गुजरेगा, जिससे लखनऊ की दूरी 1 घंटे 40 मिनट रह जाएगी.
- 865 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड रूट पर दिल्ली, नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, लखनऊ और वाराणसी समेत 13 स्टेशन होंगे.
- इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा और यह कॉरिडोर 2031 तक पूरा होगा.
- जेवर एयरपोर्ट परिसर में ही देश का सबसे बड़ा मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनेगा, जहां रैपिड रेल, मेट्रो और पॉड टैक्सी जुड़ेंगे.
- जेवर में 8200 करोड़ के सोलर प्लांट की नींव रखी गई है, जिससे 20 हजार युवाओं को नए रोजगार के अवसर मिलेंगे.
दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (DVHSR) के तहत नोएडा और जेवर एयरपोर्ट को बुलेट ट्रेन की बड़ी सौगात मिलने जा रही है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को नोएडा में इस मेगा प्रोजेक्ट का पूरा प्लान साझा किया. इस हाई-स्पीड नेटवर्क के बनने के बाद जेवर एयरपोर्ट से लखनऊ की दूरी महज 1 घंटे 40 मिनट और दिल्ली से लखनऊ का सफर सिर्फ 2 घंटे 10 मिनट में तय होगा. 2.3 लाख करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा और लखनऊ होते हुए वाराणसी तक जाएगा, जो 2031 तक पूरा होगा.
क्या है दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का पूरा रूट?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश के सात प्राथमिकता वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर में दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट सबसे अहम है. यह 865 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगा. उत्तर प्रदेश में यह ट्रेन दिल्ली के बाद सीधे नोएडा, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी पहुंचेगी. इस रूट पर कुल 12 से 13 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं. इसके अलावा सरकार का एक और बड़ा प्लान लखनऊ से अयोध्या के लिए एक विशेष लिंक लाइन जोड़ने का भी है, जिससे दिल्ली और जेवर से सीधे अयोध्या की कनेक्टिविटी हो जाएगी.
आम मुसाफिरों के लिए कैसे गेमचेंजर साबित होगा?
नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट परिसर के अंदर ही उत्तर भारत का सबसे बड़ा पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुपरहब यानी मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनाया जा रहा है. इस मेगा स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां एयरपोर्ट, बुलेट ट्रेन, नमो भारत रैपिड रेल, मेट्रो, लोकल बस टर्मिनल और पॉड टैक्सी जैसी सभी आधुनिक परिवहन सेवाएं एक ही छत के नीचे आपस में इंटरकनेक्ट होंगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हवाई सफर करने वाले यात्री बिना किसी परेशानी के तुरंत हाई-स्पीड रेल का आनंद ले सकेंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए एरियल ग्राउंड सर्वे का काम पूरा हो चुका है और अब रूट अलाइनमेंट का काम चल रहा है.
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन का क्या आंकड़ा है?
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार इस कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि इसकी ऑपरेशनल स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है. इस बेहतरीन स्पीड के कारण दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट का सफर सिर्फ 21 मिनट में पूरा हो जाएगा. वहीं जेवर से लखनऊ की दूरी 1 घंटे 40 मिनट और दिल्ली से वाराणसी का लंबा सफर महज 3.5 से 4 घंटे में सिमट जाएगा. वर्तमान में नोएडा के पास अपना कोई बड़ा रेलवे स्टेशन नहीं है, जिसके कारण लोगों को दिल्ली या गाजियाबाद जाना पड़ता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के बाद यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.
यह भी पढ़ें: दिल्ली में बदलाव की रफ्तार तेज: रेखा गुप्ता सरकार का स्वच्छ यमुना और सुरक्षित शिक्षा पर फोकस
यूपी की रिन्यूएबल एनर्जी में क्या भूमिका निभाएगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतम बुद्ध नगर के जेवर में 8200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एसएईएल (SAEL) इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की आधारशिला रखी है. इस ऐतिहासिक प्लांट के जरिए उत्तर प्रदेश का जेवर देश में सौर ऊर्जा उपकरणों के निर्माण का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा. इस प्लांट से 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इस सोलर प्रोजेक्ट से राज्य में 20 हजार युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा और कंपनी 2030 तक इस क्षेत्र में 20 हजार करोड़ रुपये का कुल निवेश करेगी.
एथेनॉल उत्पादन में यूपी किस पायदान पर खड़ा है?
सीएम योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के कार्यक्रम में गर्व से घोषणा की कि बेहतर नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश आज पूरे भारत का 55 प्रतिशत एथेनॉल उत्पादन अकेले कर रहा है. राज्य सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य एक साल के भीतर 100 नए सीबीजी (CBG) प्लांट स्थापित करने का है. इसके साथ ही पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों को रिकॉर्ड 3.22 लाख करोड़ रुपये के गन्ना मूल्य का भुगतान सीधे उनके खातों में किया है. गन्ने से बड़े पैमाने पर चीनी और एथेनॉल का निर्माण हो रहा है, जिससे न केवल रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन स्तर में भी एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है.
हाई-स्पीड कॉरिडोर समय और दूरी की तालिका (Table):
| सफर का रूट (स्टेशन से स्टेशन) | बुलेट ट्रेन से लगने वाला समय | कॉरिडोर की कुल अनुमानित लागत | मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर समय सीमा | दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर समय सीमा |
| दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट | 21 मिनट | लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये | वर्ष 2028 तक पूरा होगा | वर्ष 2031 तक पूरा होने की उम्मीद |
| जेवर एयरपोर्ट से लखनऊ | 1 घंटा 40 मिनट | लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये | वर्ष 2028 तक पूरा होगा | वर्ष 2031 तक पूरा होने की उम्मीद |
| दिल्ली से लखनऊ शहर | 2 घंटे 10 मिनट | लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये | वर्ष 2028 तक पूरा होगा | वर्ष 2031 तक पूरा होने की उम्मीद |
| दिल्ली से वाराणसी शहर | 3.5 से 4 घंटे | लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये | वर्ष 2028 तक पूरा होगा | वर्ष 2031 तक पूरा होने की उम्मीद |
निष्कर्ष:
नोएडा और जेवर में बुलेट ट्रेन, रैपिड रेल और विशाल सोलर प्लांट जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई और तेज रफ्तार देने वाली हैं. बुनियादी ढांचे में होने वाले इन क्रांतिकारी सुधारों से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य उद्योग, रिन्यूएबल एनर्जी और रोजगार के मामले में पूरे देश का नेतृत्व करेगा.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ Section):
Q1: दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन की अधिकतम और ऑपरेशनल स्पीड क्या होगी?
Ans: इस कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा और वास्तविक ऑपरेशनल स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.
Q2: जेवर में बनने वाले मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब में कौन-कौन सी सुविधाएं आपस में जुड़ी होंगी?
Ans: जेवर हब में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बुलेट ट्रेन स्टेशन, नमो भारत रैपिड रेल, मेट्रो लाइन, लोकल बस टर्मिनल और पॉड टैक्सी की सुविधाएं एक साथ इंटरकनेक्टेड होंगी.
Q3: दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना (DVHSR) कब तक पूरी तरह से बनकर तैयार होगी?
Ans: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) के अनुसार मुंबई-अहमदाबाद रूट 2028 तक और दिल्ली-वाराणसी का यह रूट 2031 तक पूरा होने की उम्मीद है.
Q4: जेवर में स्थापित होने वाले एसएईएल (SAEL) सोलर प्लांट की उत्पादन क्षमता कितनी होगी?
Ans: इस प्लांट के जरिए हर साल 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल का निर्माण किया जाएगा, जिससे चीन पर निर्भरता कम होगी.
Q5: एथेनॉल मिश्रण और उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश का देश में कितना योगदान है?
Ans: उत्तर प्रदेश अकेले पूरे भारत का कुल 55 प्रतिशत एथेनॉल उत्पादन करता है और सरकार का लक्ष्य एक साल में 100 सीबीजी प्लांट लगाने का है.