बिस्मिल्लाह खान के घर को लेकर अपनों में ही छिड़ी जंग? जानिए वाराणसी दालमंडी विवाद की पूरी कहानी

वाराणसी नगर निगम (VMC) ने काशी के भारत रत्न और पद्म पुरस्कार विजेताओं की धरोहरों को संजोने के लिए एक विशेष योजना बनाई है. एक मंजिल पर करीब 225 वर्ग फीट के कमरे को भव्य संग्रहालय (Museum) के रूप में विकसित किया जाएगा. (वाराणसी से अभिषेक दुबे की रिपोर्ट)

Ustad Bismillah Khan

बिस्मिल्लाह खान के निधन के बाद मकान उनके बड़े बेटे स्वर्गीय मेहताब हुसैन के नाम पर दर्ज था. (Photo: News24)

वाराणसी के दालमंडी के सराय हड़हा, भीखाशाह गली में स्थित भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के तीन मंजिला पैतृक मकान को तोड़े जाने को लेकर हाल ही में काफी विवाद गरमा गया था. सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे. आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले का असली सच और कानूनी विवाद क्या है.

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क्या है विवाद की मुख्य वजह?

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के इस पुश्तैनी मकान को लेकर उनके ही परिवार (पोतों और परपोतों) के बीच पिछले 10 वर्षों से संपत्ति का विवाद चल रहा था. बिस्मिल्लाह खान के निधन के बाद मकान उनके बड़े बेटे स्वर्गीय मेहताब हुसैन के नाम पर दर्ज था, जबकि वर्तमान में वहां उनके दूसरे बेटे नैय्यर हुसैन के परिवार के करीब 35 सदस्य रह रहे थे.

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बिल्डर के तोड़फोड़ के बाद पहुंची पुलिस

हाल ही में मेहताब हुसैन के बेटे मोहम्मद सिब्तैन ने इस जर्जर हो चुके मकान को गिराकर नया निर्माण कराने के लिए बिल्डर्स को बुलाया. जैसे ही बिल्डर तोड़फोड़ के लिए पहुंचे, वहां रह रहे परिवार के दूसरे पक्ष यावर अब्बास और अन्य ने इसका कड़ा विरोध किया और काम रुकवाकर पुलिस बुला ली, जिससे यह मामला चर्चा में आ गया. मकान गिराए जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर कार्रवाई का आरोप लगाया, लेकिन यह पूरी तरह गलत दावा है.

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परिवार के बीच पुलिस ने कराया समझौता

घर को लेकर विवाद पूरी तरह से पारिवारिक और मालिकाना हक का मामला था. जब पुलिस मौके पर पहुंची और चौक थाना में दोनों पक्षों को बुलाया गया, तो मोहम्मद सिब्तैन ने 1941 के पंजीकृत बैनामे रजिस्ट्री के कागज पेश किए. दूसरा पक्ष कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं दिखा पाया, जिसके बाद पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया और अब सहमति से काम शुरू किया गया है.

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क्या है नगर निगम का म्यूजियम प्लान?

वाराणसी नगर निगम (VMC) ने काशी के भारत रत्न और पद्म पुरस्कार विजेताओं की धरोहरों को संजोने के लिए एक विशेष योजना बनाई है. इस योजना के तहत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के इस मकान की एक मंजिल पर करीब 225 वर्ग फीट के कमरे को भव्य संग्रहालय (Museum) के रूप में विकसित किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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