वाराणसी के दालमंडी के सराय हड़हा, भीखाशाह गली में स्थित भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के तीन मंजिला पैतृक मकान को तोड़े जाने को लेकर हाल ही में काफी विवाद गरमा गया था. सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे. आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले का असली सच और कानूनी विवाद क्या है.
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के इस पुश्तैनी मकान को लेकर उनके ही परिवार (पोतों और परपोतों) के बीच पिछले 10 वर्षों से संपत्ति का विवाद चल रहा था. बिस्मिल्लाह खान के निधन के बाद मकान उनके बड़े बेटे स्वर्गीय मेहताब हुसैन के नाम पर दर्ज था, जबकि वर्तमान में वहां उनके दूसरे बेटे नैय्यर हुसैन के परिवार के करीब 35 सदस्य रह रहे थे.
बिल्डर के तोड़फोड़ के बाद पहुंची पुलिस
हाल ही में मेहताब हुसैन के बेटे मोहम्मद सिब्तैन ने इस जर्जर हो चुके मकान को गिराकर नया निर्माण कराने के लिए बिल्डर्स को बुलाया. जैसे ही बिल्डर तोड़फोड़ के लिए पहुंचे, वहां रह रहे परिवार के दूसरे पक्ष यावर अब्बास और अन्य ने इसका कड़ा विरोध किया और काम रुकवाकर पुलिस बुला ली, जिससे यह मामला चर्चा में आ गया. मकान गिराए जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार और प्रशासन पर कार्रवाई का आरोप लगाया, लेकिन यह पूरी तरह गलत दावा है.
परिवार के बीच पुलिस ने कराया समझौता
घर को लेकर विवाद पूरी तरह से पारिवारिक और मालिकाना हक का मामला था. जब पुलिस मौके पर पहुंची और चौक थाना में दोनों पक्षों को बुलाया गया, तो मोहम्मद सिब्तैन ने 1941 के पंजीकृत बैनामे रजिस्ट्री के कागज पेश किए. दूसरा पक्ष कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं दिखा पाया, जिसके बाद पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया और अब सहमति से काम शुरू किया गया है.
क्या है नगर निगम का म्यूजियम प्लान?
वाराणसी नगर निगम (VMC) ने काशी के भारत रत्न और पद्म पुरस्कार विजेताओं की धरोहरों को संजोने के लिए एक विशेष योजना बनाई है. इस योजना के तहत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के इस मकान की एक मंजिल पर करीब 225 वर्ग फीट के कमरे को भव्य संग्रहालय (Museum) के रूप में विकसित किया जाएगा.