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राम मंदिर दान चोरी पर बड़े खुलासे, चंपत राय से मिले ट्रस्ट के ट्रेजरर गोविंद देव गिरी, इस्तीफे पर क्या बोले पूर्व महासचिव?

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर दान चोरी मामले के आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कुछ नए खुलासे किए हैं और अहम जानकारियां दी हैं। वहीं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने चंपत राय से मुलाकात करके उनका हाल-चाल जाना और इस्तीफे के लेकर उनका मन टटोला।

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राम मंदिर दान चोरी मामले पर पूरे देश की सियासत गरमाई हुई है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पूर्व महासचिव चंपत राय से मुलाकात की और उनसे इस्तीफे को लेकर चर्चा की। मुलाकात के बाद देव गिरी ने बताया कि मैं बीते दिन चंपत राय से मिला। उनसे मिलने का उद्देश्य उनके स्वास्थ्य के बारे में जानना था। वे स्वस्थ हैं, संतुष्ट हैं और अपने इस्तीफे को लेकर नाराज नहीं हैं, उन्हें कोई शिकायत नहीं है। वहीं अयोध्या के स्थानीय संत और धर्मगुरु भी राम मंदिर ट्रस्ट के द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत हैं।

बंद कमरे में 2 घंटे तक चली मुलाकात

गोविंद देव ने बताया कि स्थानीय संत और धर्मगुरु पूजा-पाठ और मंदिर के संचालन से जुड़े नियमों में सुधार चाहते हैं, जिसके लिए हम प्रतिबद्ध हैं। उन्हें आश्वासन दिया गया है कि ऐसी घटना दोबारा कभी नहीं होगी। बता दें कि चंपत राय और गोविंद देव की बंद कमरे में करीब 2 घंटे बातचीत हुई। इस दौरान दोनों के बीच दान चोरी, आरोपियों, पुलिस जांच, दान गणना की प्रक्रिया, राम मंदिर के संचालन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई और अहम जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ।

पुलिस के सामने आरोपियों के खुलासे

दान चोरी मामले के आरोपियों अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र और करुणेश पांडेय ने कबूल किया है कि राम मंदिर के दान पात्रों से निकलने वाले पैसे को गिनते समय चोरी किया जाता था और चोरी किए पैसे का बंटवारा लखनऊ-गोरखपुर नेशनल हाईवे पर भीखापुर के पास एक बाग में किया जाता था। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने आरोपियों का रिमांड दिया है, जिसके तहत पुलिस टीम ने मामले के विवेचक क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में पूछताछ की।

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आमने-सामने बिठाकर पूछे गए सवाल

तीनों आरोपियों अनुकल्प, उसके बहनोई लवकुश और करुणेश पांडेय को पुलिस लाइन ले जाया गया। वहां मेडिकल कराने के बाद तीनों से बारी-बारी पूछताछ की गई। फिर तीनों का आमने-सामने बिठाकर दान चोरी से जुड़े सवाल पूछे गए। सवालों के जवाब देते हुए आरेपियों ने यह नहीं बताया कि वे किसके इशारे पर दान चोरी करते थे, लेकिन ट्रस्टियों की दान चोरी होने की जानकारी पहले से थी। बावजूद इसके दान चोरी रोकने के इतंजाम करना तो दूर प्रयास तक नहीं किया गया था।

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पुलिस के सामने आरोपियों का कबूलनामा

आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उन्हें गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव और मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू सहयोग करते थे। हालांकि दान चोरी करते हुए उन्हें पकड़ लिया गया था, लेकिन न कोई कार्रवाई की गई और न ही उन्हें दान चोरी के काम से हटाया गया। पुलिस आरोपियों को पूछताछ के बाद उस बाग को वेरिफाई कराने के लिए भीखापुर लेकर गई, जहां वे दान चोरी के पैसों का बंटवारा करते थे। आरोपी अविनाश शुक्ल ने भी यहीं पैसों का बंटवार होने की बात बताई थी।

अनुकल्प के पिता और चाचा से भी पूछताछ

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अनुकल्प के पिता रवींद्र मिश्र उर्फ रवि, चाचा रामेंद्र मिश्र, इनायतनगर बाजार के सराफा कारोबारी विजय कुमार कौशल उर्फ घनश्याम से भी पूछताछ की थी। तीनों से अनुकल्प के सामने पूछताछ की गई थी, जिसमें खुलासा हुआ कि विजय कौशल को अनुकल्प मिश्र ने करीब 900 ग्राम सोना दिया था, जिसे उसने गलाया, लेकिन बदले में विजय ने उसे कितने पैसे दिए, इसकी जानकारी अभी तक पता नहीं चल पाई। जांच पड़ताल जारी है, जल्दी ही सच सभी के सामने होंगे।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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