यूपी में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। चुनाव आयोग के मुताबिक राज्य में करीब 2.89 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। औसतन हर पोलिंग बूथ से 200 से ज्यादा नाम डिलीट हुए हैं। हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, बिना दस्तावेज वाले और अनट्रेसेबल मतदाता शामिल हैं।
इसी बीच सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक अभियान शुरू किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, हर बूथ पर 200 नए मतदाता जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके तहत 3.5 करोड़ से ज्यादा जेनुइन वोटर्स को जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है। इसमें नए युवा मतदाता, दस्तावेजी कारणों से हटे नाम, और अब तक अनमैप्ड मतदाता शामिल होंगे।
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सूत्रों के मुताबिक ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, एमएलसी और संगठन पदाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर बड़े पैमाने पर हुए डिलीशन पर चिंता जताई और रणनीति तय की।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि दूसरे राज्यों में काम कर रहे यूपी मूल के लोगों से संपर्क कर उन्हें यूपी में दोबारा पंजीकरण कराने को कहा जाएगा। वहीं जिन मतदाताओं के नाम दो जगह दर्ज हैं, उन्हें जहां आसानी से वोट डाल सकें, वहां नाम बनाए रखने का आग्रह किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दावे-आपत्तियां 6 जनवरी से 6 फरवरी तक ली जाएंगी और अंतिम वोटर लिस्ट 6 मार्च को प्रकाशित होगी। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है।
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