शुरुआती रुझानों में TMC की उम्मीदवार झरना सरदार आगे चल रही हैं.
संदेशखाली में वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. फिलहाल पोस्टल बेलेट की काउंटिंग जारी है. जल्द ही EVM की गिनती भी शुरू हो जाएगी.
संदेशखाली में वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है. पहले रुझानों के लिए हमारे साथ बने रहिए.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू हो गई है और इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. राज्य की 293 विधानसभा सीटों के लिए वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है. यहां मुख्य मुकाबला सत्ताधारी टीएमसी और प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी के बीच है.
आज 4 मई, सोमवार को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे. कुल 294 में से 293 सीटों पर मतगणना होगी, जबकि दक्षिण 24 परगना के फलता क्षेत्र में दोबारा मतदान होना अभी बाकी है. वोटों की गिनती सुबह लगभग 8 बजे शुरू होगी. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जाएगी, उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के वोटों की गिनती शुरू होगी.
Sandeshkhali Election Result 2026 Live Updates: सुंदरबन के दलदली इलाकों में बसा संदेशखाली सिर्फ भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सियासत के मामले में भी बेहद संवेदनशील है. यह उत्तर 24 परगना का एक अनूठा विधानसभा क्षेत्र है, जो अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित है. यहां की जिंदगी नदियों और तटबंधों के सहारे चलती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह जमीन कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा की वजह से चर्चा में रही है. 2026 के चुनाव में यह सीट सबसे ज्यादा देखी जा रही है.
उम्मीदवारों की टक्कर
इस बार संदेशखाली में चौ-तरफा मुकाबला है. तृणमूल कांग्रेस ने झरना सरदार पर दांव लगाया है. भाजपा ने सनत सरदार को मैदान में उतारा है. वाम मोर्चा की तरफ से रवींद्र नाथ महता चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने युधिष्ठिर भूमिज को टिकट दिया है. हालांकि असली कांटे की लड़ाई तो तृणमूल और भाजपा के बीच ही मानी जा रही है. 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यहां 47 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर बढ़त बना ली थी, जो 2021 के मुकाबले बड़ा उछाल था.
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संदेशखाली विधानसभा चुनाव परिणाम 2026
4 मई सुबह 8 बजे से यहां मतगणना शुरू होगी. उम्मीद है कि दोपहर तक तस्वीर साफ हो जाएगी. यह सीट बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार मतदान प्रतिशत में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन यह अब भी 82 फीसदी के करीब है. ग्रामीण सीट होने के नाते यहां वोटर जागरूकता काफी अधिक है. अनुसूचित जाति के वोटर यहां 36 फीसदी हैं, जो सबसे बड़ा समूह है. अनुसूचित जनजाति करीब 25 फीसदी और मुस्लिम करीब 24.5 फीसदी हैं. यह जातीय समीकरण हर दल के लिए पहेली जैसा है.
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पिछला विधानसभा चुनाव परिणाम (2021)
2021 के चुनाव में यहां तृणमूल कांग्रेस का परचम लहराया था. सुकुमार महता ने भाजपा के डॉ. भास्कर सरदार को 39,685 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. सुकुमार महता को कुल 1,12,450 वोट मिले थे, जबकि भास्कर सरदार 72,765 वोट पर सिमट गए थे. तीसरे नंबर पर सीपीआई(एम) के निरपद सरदार थे, जिन्हें मात्र 21,036 वोट मिले. यानी तब वामपंथ यहां बुरी तरह से हाशिए पर था. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर तेजी से बढ़ा, जिससे साफ है कि 2026 का गणित बदल चुका है.
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2016 के चुनाव परिणाम
2016 में यह सीट वाममोर्चे के किले से तृणमूल की तरफ झुकी थी. 2011 से पहले लगातार आठ बार सीपीआई(एम) यहां से जीतती रही थी. लेकिन 2016 में तृणमूल के सुकुमार महता ने इतिहास रच दिया. उन्होंने सीपीआई(एम) के निरपद सरदार को 38,190 वोटों से हराया. सुकुमार को 93,745 वोट मिले, जबकि निरपद सरदार 55,555 वोट पर रुक गए. भाजपा के उम्मीदवार तब तीसरे स्थान पर थे, जिन्हें मात्र 14,358 वोट मिले थे. यानी 2016 से 2021 के बीच भाजपा ने यहां अपनी स्थिति मजबूत की और 2021 में वह दूसरे नंबर पर आ गई.
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संदेशखाली की मिट्टी में अब सिर्फ धान और मछली नहीं पनपती, बल्कि राजनीतिक उबाल भी उठता है. 2024 की शुरुआत में यहां जो हिंसा हुई और शेख शाहजहां जैसे स्थानीय ताकतवर नेता के खिलाफ केस दर्ज हुए, उसने स्थानीय जनता के मन में बहुत गुस्सा भर दिया है. खासकर अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति की महिलाएं इस बार बदलाव की मांग कर रही हैं. अब देखना यह है कि वह गुस्सा भाजपा के पल्ले पड़ता है या तृणमूल अपनी पुरानी योजनाओं के दम पर बाजी पलट लेती है. 4 मई को संदेशखाली अपना सियासी फैसला सुना देगा.
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