सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के हत्यारों तक कैसे पहुंची पुलिस? 5 दिन में क्या-क्या हुआ, कमिश्नर की जुबानी जानिए पूरी कहानी

Sukhdev Singh Gogamedi Murder Case-Rajasthan Police Press Conference : श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड के आरोपियों को राजस्थान पुलिस ने पांच दिन की कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया है।

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Sukhdev Singh Gogamedi Murder Case, जयपुर (केजे श्रीवत्सन): राजस्थान में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड में पुलिस अब तक दो शूटर्स, इनकी मदद करने वाले एक साथी और सोशल मीडिया पर इस वारदात की जिम्मेदारी लेने वाले को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके लिए पिछले 5 दिन से राजस्थान पुलिस मारी-मारी फिर रही थी, जिसने राजस्थान ही नहीं, पड़ोसी राज्य हरियाणा के हिसार और गुरुग्राम को मिलाकर 500 से ज्यादा जगह के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आखिर बदमाशों को काबू करने में कामयाब रही। इस बारे में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी देते हुए जयपुर के पुलिस कमिश्नर बीजू जोसेफ जॉर्ज ने कहा कि इस मामले में लगभग 8 लोग और शामिल हो सकते हैं, जिन्हें पुलिस जल्द ही धर-दबोचेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपने से पहले राजस्थान पुलिस मामले की तहत तक जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

5 दिसंबर को घर में घुसकर की थी हत्या, अब तक चार गिरफ्तार

दरअसल, 5 दिसंबर को श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की जयपुर के श्याम नगर स्थित उनके घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अभी तक के रिकॉर्ड के अनुसार 3-4 लोग उस दिन सुखदेव सिंह गोगामेड़ी से मिलने आए थे। गार्ड के द्वारा अंदर ले जाने पर वहां बदमाशों ने पहले गोगामेड़ी के साथ चाय की चुस्कियां ली और फिर मौका पाकर उन पर गोलियां बरसा दीं। घायल राजपूत नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को तुरंत महानगर के मेट्रो मास अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दौरान क्रॉस फायरिंग में नवीन सिंह शेखावत नामक एक आरोपी की भी मौत हो गई थी।

यह घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिसे आधार बनाकर जांच में जुटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने वाले रोहित गोदारा के नाम से आईडी चला रहे एक युवक को गिरफ्तार किया। शनिवार को दूसरी गिरफ्तार शूटर्स को वारदात वाली जगह से उठाकर बस में चढ़ाने वाले हरियाणा के महेंद्रगढ़ से रामवीर नामक युवक के रूप में हुई। इसके बाद शनिवार देर रात दो शूटर्स नितिन फौजी तो उसके साथी रोहित राठौड़ को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो इसके लिए टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। तब कहीं जाकर अलग-अलग जगह से ये लोग हाथ आए हैं। राजस्थान के डीडवाना से हरियाणा के हिसार और गुरुग्राम में पुलिस ने 500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाली।

जयपुर से डीडवाना और फिर कहां से कहां पहुंचे बदमाश? 

रविवार को जयपुर में मीडिया से मुखातिब हो जयपुर के पुलिस कमिश्नर बीजू जोसेफ जॉर्ज ने बताया कि 5 दिसम्बर को सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद भागे आरोपियों को पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं था। मामले की जांच के लिए गठित SIT और साइबर सेल ने तकनीकी सबूत के जरिये बदमाशों की तलाश शुरू की तो 6 से 8 घंटे में डीडवाना पहुंचकर इन्हें पनाह देने वाले की जानकारी जुटाई। हरियाणा पुलिस से इनके डीडवाना से हिसार पहुंच जाने की सूचना मिली तो राजस्थान पुलिस ने दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की मदद से 9 दिसम्बर को दो शूटर्स और लोजिस्टिक सपॉर्ट देने वालों को पकड़ लिया। उधर, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में बदमाशों ने बताया कि वो पहले ट्रेन से हिसार और वहां से उधम सिंह के साथ मनाली पहुंचे। वहां से मंडी और एक दिन बाद मंडी से तीनों लोग चंडीगढ़ आए तो पीछा कर रही पुलिस ने एक होटल से इन्हें धर-दबोचा।

कमिश्नर का दावा-NIA को देने से पहले हर खुलासा कर लेगी पुलिस

पुलिस अधिकारी की मानें तो शूटर्स बहुत से आपराधिक मामलों में शामिल वीरेंद्र चौहान नामक एक अन्य बदमाश के संपर्क में थे। वह गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े गैंगस्टर रोहित गोदारा का करीबी है। फरारी के वक्त शूटर्स के द्वारा वीरेंद्र चौहान को की गई कॉल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने इनका पीछा किया। फिलहाल इस मामले की तह तक जाने की दिशा में कार्रवाई जारी है। इस मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हवाले करने से पहले तमाम गिरफ्तारियां और खुलासे कर लिए जाएंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस कमिश्नर बीजू जोसेफ जॉर्ज ने दिवंगत सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के द्वारा सिक्योरिटी मांगे जाने और नहीं मिलने को लेकर ज्यूडिशियल इन्क्वारी में खुलासा होने की बात कही, वहीं उन्होंने यह भी बताया राजस्थान पुलिस का दिल्ली पुलिस के साथ किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। दिल्ली पुलिस रोहित से किसी मामले में पूछ्ताछ करना चाहती थी, जिसके चलते उसे अपने पास रखा।

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