Administrative lapse in Rajasthan: राजस्थान में इन दिनों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों का दौर चल रहा है। इसी बीच राज्य के राजस्व विभाग से एक बेहद हैरान करने वाली प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। विभाग की ओर से जारी की गई पटवारियों की नई तबादला सूची में एक मौजूदा विधायक का ही नाम शामिल कर दिया गया, जैसे ही यह ट्रांसफर लिस्ट सार्वजनिक हुई, प्रशासनिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया और लोग इस पर तरह-तरह के सवाल उठाने लगे।

लेटरहेड की अनुशंसा बनी वजह

मामले की पड़ताल करने पर पता चला कि राजस्व विभाग की इस सूची में गलती से डीग-कुम्हेर सीट से बीजेपी विधायक शैलेश दिगंबर सिंह का नाम दर्ज हो गया था। असल में, विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र के कुछ लोगों के तबादले के लिए अपने आधिकारिक लेटरहेड पर विभाग को अनुशंसा (सिफारिश) भेजी थी। लेकिन कर्मचारियों की लापरवाही के कारण सूची तैयार करते समय विधायक का नाम ही पटवारियों की लिस्ट में शामिल कर दिया गया।

विभाग ने माना लिपिकीय एरर

मामला तूल पकड़ते ही राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारियों ने इस पूरे वाकये पर सफाई दी। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह पूरी तरह से एक क्लेरिकल (लिपिकीय) और तकनीकी त्रुटि थी। अधिकारियों का कहना है कि डेटा एंट्री के समय हुई इस गलती को सुधारने का काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही संशोधित ट्रांसफर लिस्ट जारी की जाएगी।

प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

गौरतलब है कि राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर तबादले किए जा रहे हैं। लेकिन एक के बाद एक तबादला आदेशों में आ रही इस तरह की गंभीर गलतियों ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। विपक्ष और आम जनता अब इस बात को लेकर चुटकियां ले रही है कि जब विधायक का ही नाम पटवारी की लिस्ट में आ सकता है, तो आम कर्मचारियों का क्या हाल होता होगा।