राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा के एक प्रत्याशी के साथ बेहद अजीब वाकया सामने आया है. डीडवाना-कुचामन जिले की परबतसर नगरपालिका के चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार को महज एक वोट से ही संतोष करना पड़ा. दिलचस्प बात यह रही कि प्रत्याशी को मिला यह इकलौता वोट भी उनका खुद का नहीं था, क्योंकि वह उस वार्ड के वोटर ही नहीं थे. वार्ड 20 में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रत्याशी के साथ भी ऐसा ही हुआ. मतगणना के नतीजे आए तो हर कोई हैरान रह गया.
कुल 25 वार्डों वाली परबतसर नगरपालिका में कांग्रेस ने 13 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि भाजपा 12 वार्ड जीतने में कामयाब रही. राज्य के 309 नगर निकायों के लिए हुई मतगणना के दौरान वार्ड संख्या-13 का यह नतीजा दिनभर आम लोगों और सियासी हलकों में खूब चर्चा का विषय बना रहा.
राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों के मुताबिक, परबतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर-13 से बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चंद्र चुनाव मैदान में थे, जबकि वार्ड नंबर-20 से आरएलपी ने भंवरलाल को उम्मीदवार बनाया था. जब मतगणना के नतीजे आए तो हर कोई हैरान रह गया, कांग्रेस उम्मीदवार हिना खानम ने 376 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की. वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी राशिद खान 195 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे, जबकि भाजपा और RLP प्रत्याशी 1-1 वोट पर ही सिमट गए.
खुद को भी वोट नहीं दे पाए बीजेपी प्रत्याशी
नतीजों के बाद कैलाशचंद ने बताया कि वे असल में वार्ड संख्या-12 के मतदाता हैं, लेकिन पार्टी संगठन ने उन्हें पड़ोस के वार्ड संख्या-13 से टिकट देकर मैदान में उतारा था. वह अपने वार्ड में न होने के कारण खुद को भी वोट नहीं दे सके. . उन्हें जो एक वोट मिला है, वह वार्ड संख्या-13 के ही किसी मतदाता ने दिया है. बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर-13 में पार्टी को कोई मजबूत चेहरा नहीं मिल रहा था, इसलिए कांग्रेस को वॉकओवर मिलने से रोकने के लिए पार्टी संगठन ने कैलाश चंद्र को वार्ड-13 से मैदान में उतार दिया.
आरएलपी उम्मीदवार की भी फजीहत
वहीं दूसरी ओर, वार्ड नंबर-20 से आरएलपी प्रत्याशी भंवरलाल को भी जनता ने पूरी तरह नकार दिया और उन्हें भी महज एक ही वोट मिला. राजस्थान की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाली आरएलपी के उम्मीदवार का इस तरह सिमटना पार्टी के स्थानीय जनाधार पर सवाल खड़े कर रहा है. परबतसर नगर पालिका के इस चुनावी परिणाम ने साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर केवल पार्टी के सिंबल के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता, बल्कि स्थानीय पकड़ और सही प्रत्याशी चयन ही जीत तय करता है.
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