राजस्थान की सियासत में टोंक से सामने आए एक वीडियो ने नया बवाल खड़ा कर दिया है. मामला जुड़ा है बीजेपी के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया से, जिनका एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. आरोप है कि उन्होंने धर्म के आधार पर एक मुस्लिम महिला से कंबल वापस ले लिया. वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे जांच का विषय बता रहा है.
वायरल वीडियो में दिख रहा है कि पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया जरूरतमंद लोगों को कंबल बांट रहे हैं. इसी दौरान उनकी नजर एक महिला पर पड़ती है. पहचान पूछने पर महिला खुद को मुस्लिम बताती है. आरोप है कि इसके बाद जौनपुरिया नाराज हो जाते हैं, महिला को दिया गया कंबल वापस ले लेते हैं और कहते हैं कि जो लोग प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उनकी मदद नहीं की जा सकती. यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा चुका है.
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जैसे ही वीडियो वायरल हुआ विपक्ष ने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा. इस पर राजस्थान के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेडम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार वीडियो की जांच कराएगी और परीक्षण के बाद ही कोई कार्रवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि आजकल एआई का दौर है, इसलिए वीडियो की सत्यता की पुष्टि जरूरी है. साथ ही उन्होंने बचाव में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की “सबका साथ, सबका विकास” की नीति पर पार्टी काम करती है और बीजेपी धार्मिक आधार पर भेदभाव नहीं करती. हालांकि मंत्री के साथ-साथ भाजपा के तमाम नेता भी सीधे तौर पर आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए.
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उधर, विपक्ष ने इस बयान को शर्मनाक बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि देश किस दिशा में जा रहा है. राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जुली ने कहा कि मंत्री को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन वह वीडियो को एआई बताकर मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने पूर्व सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की. कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक रफीक खान ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग करेगी. उनके मुताबिक केवल बयानबाजी से काम नहीं चलेगा.
टोंक का यह वीडियो अब राजनीतिक जंग का नया मैदान बन चुका है. एक तरफ सरकार जांच की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे सीधा धार्मिक भेदभाव का मामला बता रहा है. सवाल यह है कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच कितने दिन में पूरी होगी और क्या उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई होगी? फिलहाल, कंबल से शुरू हुआ विवाद राजस्थान की सियासत को गर्मा चुका है.