राजस्थान के नागौर जिले में साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 34 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दिल्ली से चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है. साथ ही ठगी गई रकम में से 5.54 लाख रुपये बैंक खातों में होल्ड भी करवा दिए गए हैं.

फर्जी पुलिस बनकर रचा डर का खेल

मामला गोटन निवासी जस्साराम से जुड़ा है, जिन्हें ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कॉल किया. आरोपियों ने किसी गंभीर मामले में फंसाने की धमकी दी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया. घबराए पीड़ित को जाली दस्तावेज और नकली इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड दिखाकर भरोसा दिलाया गया, जिसके बाद उन्होंने 34 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए.

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पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दिल्ली में दबिश

नागौर एसपी रोशन मीणा के निर्देशन और एएसपी प्रवेन्द्र सिंह महेला की निगरानी में विशेष टीम गठित की गई. साइबर थाना प्रभारी डीएसपी धरम पूनिया के नेतृत्व में टीम ने दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में छापेमारी कर चार आरोपियों—इमरान, विवेक कुमार, सलमान और योगेन्द्र—को गिरफ्तार किया.

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‘म्यूल अकाउंट’ से चलता था पूरा खेल

जांच में सामने आया कि आरोपी इमरान और विवेक कुमार अपने नाम से फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाते थे. इन खातों को वे मुख्य साइबर ठगों को बेच देते थे, जिनका इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे अपराधों में किया जाता था.

ठगी की रकम पर आंशिक रोक

पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 5,54,919 रुपये विभिन्न बैंक खातों में फ्रीज (होल्ड) करवा लिए हैं. मामले में आगे की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है.

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