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मीणा के इस्तीफे से बीजेपी को कितना नुकसान? राजस्थान उपचुनाव में दो सीटों पर प्रभाव डालेंगे बाबा!

Kirori Lal Meena Resignation: किरोड़ी लाल मीणा के इस्तीफा दिए जाने के बाद राजस्थान की राजनीति में उबाल दिख रहा है। बीजेपी की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। क्योंकि कुछ ही दिनों में विधानसभा की 5 सीटों पर उपचुनाव होना है। ऐसे में पार्टी को दिग्गज नेता की नाराजगी भारी पड़ सकती है। पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू कर दी है।

किरोड़ी लाल मीणा।
Rajasthan CM Bhajanlal Sharma: बीजेपी की चिंताएं किरोड़ी लाल मीणा ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर बढ़ा दी हैं। कुछ ही समय बाद राजस्थान में विधानसभा की 5 सीटों पर उपचुनाव होना है। ऐसे में दिग्गज नेता की नाराजगी बीजेपी को भारी पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि दो सीटों पर बाबा (किरोड़ी लाल मीणा) की सीधी पकड़ है। यानी उनकी नाराजगी के कारण बीजेपी को इन सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। पार्टी डैमेज कंट्रोल की कवायद में जुटी है। बताया जा रहा है कि बीजेपी ने चुनावों को लेकर अपनी रणनीति बना ली है। यह भी पढ़ें:बेटी के लव मैरिज करने पर पिता ने खोया आपा, ससुराल में घुसकर दो लोगों को मारी गोलियां, एक की मौत उपचुनाव में बीजेपी की रणनीति सभी 5 सीटों पर जीतने की है। लेकिन किरोड़ी लाल को लेकर खलबली बीजेपी में दिख रही है। पार्टी को यही डर है कि उनकी नाराजगी के कारण समीकरण बिगड़ न जाएं। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जो नुकसान झेलना पड़ा था। पार्टी उसको लेकर भी चौकन्नी है। लोकसभा में बीजेपी को मनमाफिक नतीजे नहीं मिले हैं। पार्टी को ऐसी सीटों पर भी हार का सामना करना पड़ा, जहां वह जीत को लेकर निश्चिंत थी। अब मीणा ने इस्तीफा देकर पार्टी को और कड़ी चुनौती दे दी है।

बीजेपी ने तैयार किया खास प्लान

पार्टी ने पांचों सीटों को लेकर जो प्रभारी बनाए हैं, उनके साथ मीटिंग कर खास प्लान तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार प्रभारियों को 13 जुलाई तक अपने इलाकों में वर्करों से भेंट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। दो महीने तक लगातार अपने इलाके में सक्रिय रहने के आदेश भी आलाकमान और राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने जारी किए हैं। यह भी पढ़ें:लेडी टीचर के सिर पर इस कदर हावी हुई शराब, कॉलर से पकड़ प्रिंसिपल को किया स्कूल से बाहर फिलहाल राजस्थान की दौसा, देवली, खींवसर, चौरासी और झुंझुनू सीटें खाली हैं। इनके विधायक जीतकर सांसद बन चुके हैं। खास बात यह है कि इन सीटों पर विधानसभा चुनाव बीजेपी हार चुकी है। यानी एक भी सीट बीजेपी के कब्जे में नहीं है। ऐसे में पार्टी की रणनीति सभी सीटों पर जीत हासिल करने की है। लोकसभा में जो नुकसान बीजेपी को हुआ। इस उपचुनाव में अगर बीजेपी जीत गई तो उसकी भरपाई कहीं न कहीं हो जाएगी। हाईकमान को भी पॉजिटिव संदेश जाएगा।

दौसा और देवली सीट पर मीणा वोटर ज्यादा

माना जा रहा है कि मीणा के इस्तीफे का असर दौसा और देवली सीट पर पड़ सकता है। यहां काफी संख्या में मीणा वोटर हैं, जो बीजेपी से छिटक सकते हैं। देवली से पहले हरीश मीणा विधायक रह चुके हैं। वहीं, दौसा से मुरारी लाल मीणा जीत चुके हैं। विश्लेषकों के अनुसार मीणा समुदाय के समर्थन के बिना दोनों सीटों पर विधायक नहीं बनता।


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