अध्यक्ष गोगामेड़ी की हत्या के बाद श्री राजपूत करणी सेना की खुली चेतावनी, 'अंजाम भुगतने को तैयार रहे सरकार'

Karni Sena President Murder Case : जयपुर में श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद संगठन ने राज्य सरकार को संघर्ष करने और उसके बाद बिगड़ने वाले हालात के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।

Sukhdev Singh Gogamedi
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Karni Sena President Murder Case, जयपुर : राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के सामने शपथ लेने से पहले ही संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई। मामला मंगलवार को राज्य के राजधानी नगर जयपुर में राजपूत नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या का है। इसके बाद उनके संगठन श्री राजपूत करणी सेना ने सरकार काे अगले बिगड़े हालात से निपटने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है। आरोप है कि गोगामेड़ी पिछले करीब 2 साल से सिक्योरिटी की मांग कर रहे थे और इसे लगातार दरकिनार किया जा रहा था। उधर, इस हत्याकांड को लेकर कुख्यात बदमाश लॉरेंस बिश्नोई के गैंग का नाम आ रहा है।

घर आकर मिलने की बात कह पहले चाय पी और फिर बरसा दीं गोलियां

बता दें कि मंगलवार को श्री राजपूत करणी सेना के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को जयपुर में उनके घर में घुसकर गोली मार दी गई। इस बारे में संगठन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह मामडोली ने बताया कि मंगलवार को 3-4 लोग सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर आए और सुरक्षा गार्ड्स से उनसे (गोगामेड़ी से) मिलवाने के कहा। गार्ड उनको अंदर ले गए तो वहां चाय पीने के बाद अज्ञात लोगों ने सुखदेव सिंह गोगामेड़ी पर गोलियां बरसा दीं। वारदात को अंजाम देकर बदमाश फरार हो गए और आनन-फानन में घायल राजपूत नेता को महानगर के मेट्रो मास अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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इस घटना पर संगठन की तरफ से दुख व्यक्त किया गया है। संगठन के ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के हैंडलर पर लिखा है, ‘बहुत ही दुखत घटना समाज की बुलंद आवाज सुखदेव सिंह गोगामेड़ी पर 2 राउंड फायरिंग की गई, श्याम नगर इलाके में फायरिंग, जयपुर के मेट्रो मास अस्पताल में करवाया भर्ती इस घटना को बर्दास्त नहीं किया जाएगा राजस्थान सरकार अब तैयार रहे’।

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इसी के साथ श्री राजपूत करणी सेना की टिप्पणी पर गौर करें तो ऐसा होना लाजमी बताया जा रहा है, क्योंकि पिछले करीब 2 साल से सुखदेव सिंह गोगामेड़ी अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे थे और सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी। संगठन की तरफ से सवाल उठाया गया है कि पहले वीरेन्द्र सिंह नयागली, फिर चतुर सिंह, आनंदपाल सिंह और अब सुखदेव सिंह की जान ले ली गई। आगे पता नहीं किसका नंगर है। यह सीधे तौर पर प्रदेश की सरकार की नाकामी है और इसका अंजाम सरकार को भुगतना ही पड़ेगा।

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