राजस्थान के जालोर जिला कलेक्ट्रेट में एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. आहोर तहसील के जेतपुरा गांव की 80 वर्षीय दृष्टिहीन बुजुर्ग महिला कोकु देवी अपनी बंद सामाजिक सुरक्षा पेंशन की फरियाद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं. उम्र और शारीरिक अक्षमता के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं तथा जमीन पर बैठकर ही मुश्किल से आगे बढ़ पाती. उनकी स्थिति देखकर कलेक्ट्रेट में मौजूद सुरक्षाकर्मी चैनाराम ने मानवता का परिचय देते हुए उन्हें सहारा दिया और व्हीलचेयर पर बैठाकर जिला कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे के चैंबर तक पहुंचाया.

कोकु देवी की विधवा बेटी नाथुदेवी ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के दौरान फिंगरप्रिंट क्लियर नहीं आने के कारण उनकी मां की सामाजिक सुरक्षा पेंशन बंद कर दी. तब से परिवार लगातार आहोर एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय और संबंधित विभागों के चक्कर काटता रहा. लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, समाधान नहीं.

नाथुदेवी ने बताया कि उनके पिता सोनाराम बावरी का लगभग 20 वर्ष पहले कैंसर से निधन हो गया था. इसके बाद बड़े भाई वीरमाराम की करीब 10 वर्ष पहले मौत हो गई, जबकि छोटे भाई मंगलाराम का छह-सात महीने पहले खून की उल्टियां होने से निधन हो गया. अब परिवार में केवल महिलाएं और एक पोती रेशमा ही हैं, जिनके सामने आजीविका का गंभीर संकट है.

बुजुर्ग महिला के कलेक्ट्रेट पहुंचने की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर डॉ. प्रदीप के गवांडे स्वयं अपने चैंबर से बाहर आए और गैलरी में ही उनकी समस्या सुनी. उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर कोकु देवी की बंद पेंशन शीघ्र शुरू कराने, लंबित दस्तावेज प्राथमिकता से तैयार कराने तथा आवास योजना सहित सभी पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए.

कलेक्टर डॉ. प्रदीप के. गवांडे ने कहा कि मामले का निस्तारण कर दिया अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बुजुर्ग महिला की पेंशन जल्द शुरू कराई साथ ही भविष्य में भी वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनकर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए.