Amayra case charge sheet: आठ महीने की तफ्तीश… एक मासूम की मौत… और अब पुलिस की चार्जशीट। सबसे बड़ा सवाल—क्या 9 साल की अमायरा को इंसाफ मिलने की शुरुआत हुई है… या फिर सच का एक हिस्सा अब भी फाइलों में दबा हुआ है? जयपुर के नामी-गिरामी और भारी-भरकम फीस वसूलने वाले नीरजा मोदी स्कूल की चौथी मंजिल से गिरकर 9 साल की मासूम अमायरा की मौत के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। घटना के 8 महीने बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट तो दाखिल कर दी है, लेकिन इसके साथ ही इंसाफ की लड़ाई में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मृतका के माता-पिता ने पुलिस की इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
स्कूल मालिक और प्रिंसिपल समेत 4 आरोपी
जयपुर के गुलाबी शहर का एक नामी-गिरामी और भारी भरकम फीस वसूलने वाला एक प्राइवेट स्कूल… जहां बच्चे सपने लेकर जाते हैं। लेकिन इसी स्कूल की चौथी मंजिल से 9 साल की अमायरा की छलांग ने पूरे राजस्थान को झकझोर दिया था। अब, आठ महीने बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। स्कूल मालिक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल, शिक्षिका पुनीता शर्मा और सफाईकर्मी रामू को आरोपी बनाया गया है। आरोप हैं—लापरवाही, सबूत मिटाने और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन के। लेकिन चार्जशीट आते ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमायरा के पिता विजय मीणाका कहना है कि पुलिस ने मामले का सबसे अहम पहलू ही छोड़ दिया। उनका आरोप है कि बच्ची को जिस मानसिक प्रताड़ना ने मौत तक पहुंचाया, उससे जुड़े लोगों पर आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप नहीं लगाए गए। परिवार का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
क्या है जयपुर का अमायरा केस?
मामलागत 1 नवंबर 2025 का है… जयपुर के चर्चित नीरजा मोदी स्कूल में चौथी कक्षा की छात्रा अमायरा चौथी मंजिल से गिर गई। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। स्कूल प्रशासन ने फर्श पर लगे खून के धब्बे मिटा दिया शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी करीब 2 घंटे तक अंदर नहीं आने दिया। जांच के दौरान सामने आए सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए।
आरोप लगे कि सहपाठियों की लगातार छींटाकशी और कक्षा में शिक्षिका के व्यवहार ने बच्ची पर मानसिक दबाव बनाया। मामला इतना गंभीर हुआ कि स्कूल की 10वीं और 12वीं की CBSE मान्यता दो साल के लिए रद्द कर दी गई। लेकिन सवाल आज भी वहीं खड़ा है—अगर मामला इतना गंभीर था, तो आठ महीने बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? क्या सिर्फ चार्जशीट दाखिल कर देना ही न्याय की दिशा में पर्याप्त कदम है?
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को
अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होनी है। अदालत तय करेगी कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप पर्याप्त हैं या नहीं।लेकिन अदालत की कार्रवाई से पहले मृतक अमायरा के परिजन और समाज भी कुछ सवाल पूछ रहा है कि क्या एक 9 साल की बच्ची की मौत का सच पूरी तरह सामने आ पाया है?
क्या जांच में हर जिम्मेदार व्यक्ति को कटघरे में खड़ा किया गया? और सबसे बड़ा सवाल… क्या एक रसूखदार निजी स्कूल के खिलाफ जांच उतनी ही निष्पक्ष हुई, जितनी किसी आम मामले में होती?
बहरहाल, अमायरा अब लौटकर नहीं आएगी… लेकिन उसका परिवार आज भी सिर्फ एक जवाब चाहता है—क्या उनकी बेटी को पूरा इंसाफ मिलेगा?
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