राजस्थान में इंडियन एयरफोर्स अपने स्क्वाड्रनों की ताकत में करने जा रही है सबसे बड़ा इजाफा. जी हां इंडियन एयरफोर्स के सूत्रों ने न्यूज़ 24 को जानकारी देते हुए बताया कि स्वदेशी तेजस Mk1A लड़ाकू विमानों के पहले चार स्क्वाड्रनों को तैनात किया जाएगा. इसका मुख्य मकसद फॉरवर्ड एरिया में दुश्मन के हमले का तुरन्त जवाब देने से है. इसके अलावा भविस्य के युद्ध जैसा माहौल बनाकर लगातार पेट्रोलिंग और ऑपरेशन चलाने को लेकर के भी है.
नाल एयरफोर्स स्टेशन जो कि बीकानेर में है, यहां पर तेजस Mk1A का मुख्य बेस बनने जा रहा है, वायुसेना चीफ अमनप्रीत सिंह खुद इस बेस पर जाकर मुआयना कर चुके है. जिसके बाद तेजस Mk1A के पहले और तीसरे स्क्वाड्रन को तैनात करने का फैसला लिया गया है. आपको बता दें कि इंडियन एयरफोर्स का सालों से मददगार साथी के तौर पर काम कर रहे, MiG-21 बाइसन स्क्वाड्रनों के बदले अब तेजस Mk1A अब नया साथी बनने जा रही है.
आत्मनिर्भर भारत से बने तेजस Mk1A की तैनाती को लेकर नाल एयरबेस पर बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है. यानी साल 2026 के आखिरी महीने के पहले ही नाल और फालोदी, वेस्ट सेक्टर में भारत के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ऑपरेशन के मेन (मुख्य) सेंटर बनने जा रहा है.
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फॉरवर्ड एयरबेस पर क्यों जरूरी है तेजस Mk1A की तैनाती
युद्ध की बदलती परिस्थति को देखते हुए इसकी तैनाती का फैसला लिया गया है. यहां की तैनाती से सबसे मुख्य फायदा दुश्मनों पर पैनी नजर रखने को लेकर है. यानी दुश्मन अगर कोई गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा तो उसका तुरंत जवाब देना है. इसका यह भी फायदा होगा कि इससे क्विक रिएक्शन अलर्ट क्षमता स्ट्रांग होगी और जरूरत पड़ने पर ज्यादा तादाद में फाइटर प्लेन को मिशन के लिये भेजा जा सके.
तेजस Mk1A की क्या हैं खासियतें
तेजस Mk1A को मॉडर्न और एडवांस तकनीक से पूरी तरह से लैश किया गया है. AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, लांग डिस्टेंस की Astra BVR मिसाइल और मिड-एयर रिफ्यूलिंग जैसी ताकत को इसमें शामिल किया गया है. तेजस Mk1A की तैनाती से पहले नाल और फालोदी एयरबेस पे हाई लेवल पर काम किया जा रहा है, एयरबेस की मजबूती के लिए Hardened Aircraft Shelters, मॉडर्न मेंटेनेंस हैंगर और मिशन प्लानिंग सेंटर को शामिल किया गया हैं, इसका मकसद वार की स्थिति में विमानों को सुरक्षित और लगातार ऑपरेशनल रखा जा सके.
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