राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में BJP का वर्चस्व कायम रहा. भाजपा ने 41% वार्ड जीतकर प्रदेश की सियासत में अपनी स्थिति मजबूत की. वहीं कांग्रेस 35% वार्डों में ही समिट गई. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 4179 वार्डों में जीत दर्ज की. कांग्रेस के खाते में 3613 वार्ड आए और निर्दलीय उम्मीदवारों को 2273 वार्ड मिले. परिसीमन के बाद सीटें बढ़ी तो भाजपा को फायदा हुआ. BJP की सीटें पिछले निकाय चुनावों के मुकाबले 5% बढ़ीं, वहीं कांग्रेस की सीटों में पिछले चुनाव के मुकाबले 5% की गिरावट आई है. AAP, CPI (M) और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का भी फायदा हुआ.

309 निकायों में 10167 वार्डों में मतदान हुआ

बता दें कि राजस्थान नगर निकाय चुनाव 309 निकायों के 10167 वार्डों में हुए, जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 200 से अधिक नगरपालिकाएं शामिल हैं. 2 चरणों में 9 और 11 सितंबर को वोटिंग हुई थी. पहले फेज में 162 शहरी निकायों में 76.41 फीसदी और दूसरे फेज में 147 निकायों में 71.69 फीसदी वोटिंग हुई थी. दोनों फेज को मिलाकर कुल 74.05 फीसदी वोटिंग हुई. 77 उम्मीदवार निर्विरोध पार्षद चुने गए, जिनमें 37 महिलाएं हैं. बाकी सीटों के लिए मतदान कराया गया था. मतगणना 14 सितंबर को हुई और शाम तक सभी वार्डों के चुनाव परिणाम घोषित हो गए थे.

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परिसीमन के बाद 2770 नए वार्ड बन गए थे

बता दें कि राजस्थान में 2019 से 2021 के बीच 4 चरणों में निकाय चुनाव होते थे, लेकिन परिसीमन के बाद 2770 वार्ड नए जुड़ गए थे, इसलिए नगर निकायों का नक्शा बदल गया था. कुल वार्डों में 37.1% की भारी वृद्धि हुई थी. पिछले निकाय चुनाव में जहां 7474 वार्ड थे, वहीं इस बार के चुनाव में वार्डों की संख्या 10000 से ज्यादा हो गई थी.

BJP की सीटों में 56.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ

बता दें कि पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस ने 3042 वार्ड जीते थे और इस बार 3613 वार्ड जीतकर 18.7% की बढ़ोतरी अपनी सीटों में की. वहीं भाजपा ने पिछले चुनाव में 2666 वार्ड जीते थे और इस बार 4179 वार्ड जीतकर अपनी सीटों में 56.8% का इजाफा किया. पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 1672 वार्ड थे. इस बार 2273 निर्दलीय उम्मीदवार जीते और उनकी सीटों की संख्या में 35.9% की वृद्धि हो गई है.

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कांग्रेस को 5.4 प्रतिशत वोटों का नुकसान हुआ

बता दें कि पिछले चुनाव में कांग्रेस की जीत का प्रतिशत 40.7% था, लेकिन इस बार जीत का प्रतिशत गिरकर 35.3% रह गई है. यानी कांग्रेस को इस बार के निकाय चुनाव में 5.4 प्रतिशत का नुकसान हुआ है. वहीं भाजपा की हिस्सेदारी 35.7% से बढ़कर 40.8% हो गई है, यानी भाजपा को 5.1 प्रतिशत का लाभ हुआ. निर्दलीय पार्षदों के जीत प्रतिशत में .2 फीसदी की गिरावट आई, यानी पिछली बार 22.4% सीटें जीती थीं, इस बार 22.2% सीटें जीती हैं. यानी इस बार निर्दलीयों से भी ज्यादा नुकसान कांग्रेस का हुआ है.

RLP और माकपा को भी चुनाव में फायदा हुआ

बता दें कि इस बार निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा AAP, CPI(M) और हनुमान बेनीवाल की RLP (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी) का भी फायदा हुआ है. नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने पिछली बार 14 सीटों जीती थीं, इस बार 63 वार्ड जीते हैं, यानी जीत के आंकड़े में 350% का उछाल आया. माकपा (CPI-M) ने पिछले चुनाव में 8 वार्ड जीते थे, लेकिन इस बार 38 वार्ड कब्जाकर जीत का आंकड़ा 375% बढ़ाया है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने पिछले चुनाव में 24 वार्ड जीते थे, लेकिन इस बार वार्ड घटकर 19 रह गए और जीत के आंकड़े में 20.8% की गिरावट आई है.

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