राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में एसओजी (SOG) ने बड़ा खुलासा किया है. जांच एजेंसी ने इस मामले में दो आरोपियों पंकज यादव और नानजीराम चौधरी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने फर्जी डिग्री और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन कराया था. एसओजी अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.
FMG परीक्षा में असफल होने के बाद बनाई फर्जी MBBS डिग्री
एसओजी की जांच के मुताबिक, आरोपी पंकज यादव ने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में MBBS की पढ़ाई की थी. इसके बाद उसने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE) करीब छह बार दिया, लेकिन सफल नहीं हो सका. आरोप है कि परीक्षा में असफल रहने के बाद पंकज यादव ने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के नाम से फर्जी MBBS डिग्री और अंकतालिका तैयार की. इसके अलावा बिहार मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन का फर्जी प्रमाणपत्र भी बनाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में प्रस्तुत किया और इसी आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण करा लिया.
जांच के दौरान संबंधित संस्थानों से दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया. एसओजी के अनुसार, आरोपी का श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन नहीं मिला, जबकि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना से प्राप्त जवाब में उसकी डिग्री और अंकतालिका फर्जी पाई गई. एसओजी ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया.
आठवीं पास आरोपी के पास गायनेकोलॉजी की डिग्री.
इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी नानजीराम चौधरी को लेकर भी जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. एसओजी के मुताबिक, आरोपी ने The College of Physicians and Surgeons, Mumbai से जारी होने का दावा करते हुए गायनेकोलॉजी एंड ऑब्स्टेट्रिक्स में डिप्लोमा (DGO) से संबंधित दस्तावेज राजस्थान मेडिकल काउंसिल में प्रस्तुत किए थे.
संबंधित संस्थान से सत्यापन कराने पर उसकी गायनेकोलॉजी की डिग्री, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए. जांच में यह भी सामने आया कि नानजीराम चौधरी की शैक्षणिक योग्यता केवल आठवीं कक्षा तक बताई गई है. इसके बावजूद उसने दसवीं और बारहवीं की अंकतालिकाओं, MBBS डिग्री और गायनेकोलॉजी डिप्लोमा के दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराया था. एसओजी ने आरोपी को जालोर जिले के रानीवाड़ा से गिरफ्तार किया. वह वहां भास्कर अस्पताल का संचालक है.
कपड़े की दुकान पर काम करने से अस्पताल संचालक बनने तक का सफर
एसओजी की प्रेस नोट के अनुसार, नानजीराम चौधरी ने वर्ष 2010 के आसपास रानीवाड़ा में एक निजी चिकित्सक के क्लिनिक पर ओपीडी काउंटर में पर्चियां काटने का काम किया था. इसके बाद उसने कुछ वर्षों तक रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया. वर्ष 2014 में वह रानीवाड़ा के राजदेव अस्पताल में ओपीडी काउंटर पर काम करने लगा. वर्ष 2015 में उसने अस्पताल खरीद लिया और 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर अस्पताल कर दिया.
शुरुआत में अस्पताल में जनरल मेडिसिन के एक चिकित्सक काम करते थे. वर्ष 2019 में आरोपी ने अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को भी नियुक्त किया. चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम के सिलसिले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कार्यालय आने-जाने के दौरान उसने कथित तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया.
मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच
एसओजी की जांच में सामने आया कि फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने या हासिल करने के बाद उन्हें राजस्थान मेडिकल काउंसिल में प्रस्तुत कर रजिस्ट्रेशन कराया गया. मामले में काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है. राजस्थान मेडिकल काउंसिल की ओर से इस मामले में शुरुआत में आठ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. बाद में जांच के दौरान नानजीराम चौधरी का नाम भी सामने आया और उसके संबंध में अतिरिक्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई.
एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्रियां और प्रमाणपत्र किसने तैयार किए, आरोपियों को दस्तावेज उपलब्ध कराने में किन लोगों ने मदद की और इस पूरे मामले में मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन अधिकारियों या कर्मचारियों की कोई भूमिका थी या नहीं.