राजस्थान में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये आरोपी विदेश से MBBS की डिग्री लेकर भारत लौटे थे, लेकिन FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर सके. आरोप है कि उन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर राजस्थान के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की और मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया. इस मामले में अब तक 100 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाए. इससे पहले राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित 33 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
30 लाख रुपये तक में बनवाए फर्जी सर्टिफिकेट
SOG की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों ने कथित तौर पर 27 से 30 लाख रुपये तक देकर FMGE परीक्षा के फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए. इन सर्टिफिकेट के आधार पर उन्होंने राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की और रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया. पुलिस के अनुसार, फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कराने में भानाराम माली और उसके सहयोगियों की भूमिका सामने आई है. इस नेटवर्क में कथित तौर पर प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाते थे.
गिरफ्तार आरोपियों में भरतपुर और डीग के युवक शामिल
SOG ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें भारत भूषण शर्मा, सौरव शर्मा, हिमांशु शर्मा और शिवम चौधरी शामिल हैं. भारत भूषण शर्मा ने किर्गिस्तान से 2022 में MBBS की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटने के बाद कथित तौर पर 30 लाख रुपये देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाया. इसके आधार पर उसने दौसा के राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की. सौरव शर्मा ने रूस से 2017 से 2023 के बीच MBBS किया. FMGE परीक्षा पास नहीं होने पर उसने कथित तौर पर 27 लाख रुपये देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और धौलपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की. हिमांशु शर्मा ने भी रूस से MBBS किया था. पुलिस के अनुसार, उसने कथित तौर पर 27 लाख रुपये देकर फर्जी FMGE सर्टिफिकेट बनवाया और जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की. शिवम चौधरी ने कजाकिस्तान से 2016 से 2021 के बीच MBBS किया. आरोप है कि FMGE परीक्षा पास नहीं होने पर उसने 30 लाख रुपये देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया और अलवर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की.
मेडिकल काउंसिल के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
SOG के मुताबिक, इस मामले में पहले विदेश से MBBS करने वाले 28 डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन और मुख्य आरोपी भानाराम माली समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस का कहना है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने और मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कथित तौर पर मिलीभगत की गई. मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.