SIR से पंजाब की 75 सीटों पर बदला चुनावी गणित! 52 सीटों पर सबसे ज्यादा वोट कटे, 35 में मार्जिन से ज्यादा वोट हटे

पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की ड्राफ्ट सूची जारी होते ही राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बदलने लगा है. SIR में कटे वोटों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इसका असर राज्य की 117 में से 75 विधानसभा सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है. वहीं, SIR के दौरान जिन 6 बड़े जिलों में सबसे ज्यादा वोट काटे गए हैं, वहां कुल 52 विधानसभा सीटें हैं. चंडीगढ़ से अमित पांडेय की रिपोर्ट.

sir in delhi
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पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की ड्राफ्ट सूची जारी होते ही राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बदलने लगा है. SIR में कटे वोटों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इसका असर राज्य की 117 में से 75 विधानसभा सीटों के नतीजों पर पड़ सकता है. वहीं, SIR के दौरान जिन 6 बड़े जिलों में सबसे ज्यादा वोट काटे गए हैं, वहां कुल 52 विधानसभा सीटें हैं. जिनमें सबसे ज्यादा 39 AAP, कांग्रेस 11 व अकाली दल के पास 2 सीटें हैं. भाजपा को यहां 2022 में कोई सीट नहीं मिली थी. इनमें 11 सीटें ऐसी हैं, जहां हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम रहा था. वहीं, पंजाब में 35 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर 10 हजार वोट से कम रहा था.

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि SIR के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की हर विधानसभा सीट पर औसतन 17,500 वोट काटे गए हैं. यह संख्या कई सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा है. ऐसे में इन वोटों के सूची से बाहर होने से विधानसभा सीटों का चुनावी समीकरण बदल सकता है.

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राजनीतिक दलों के लिए चिंता की एक और वजह यह है कि SIR में काटे गए 20.66 लाख वोटों में करीब 10 लाख वोट ऐसे हैं, जो दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं. पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इनमें बड़ी संख्या उन वोटर्स की है, जो दूसरे राज्यों से पंजाब आए थे. उनके राज्यों में SIR होने के बाद उन्होंने वहां अपना वोट रजिस्टर्ड करा लिया.

कुल 20 लाख 66 हजार 635 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. जिसका ब्रेकअप ऐसे हैं:

ग्राफिक्स पर आंकड़े:

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स्थायी रूप से दूसरी जगह गए — 9,44,131 | 45.67%
मृत — 5,74,568 | 27.80%
अनुपस्थित/पता नहीं चला — 4,12,715 | 19.96%
डुप्लीकेट/कहीं और नाम दर्ज — 1,19,145 | 5.76%
कुल — 20,66,635 | 100%

52 सीटों पर SIR का असर

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प्रवासी मजदूरों और किराएदारों का वोट बैंक प्रभावित: लुधियाना, जालंधर और मोहाली जैसे औद्योगिक व व्यावसायिक केंद्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और किराए पर रहने वाले लोग बसते हैं. पते में बदलाव, कम टाइम के लिए रहना और जरूरी कागजात न होने के कारण इनके नाम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में हटे हैं. इससे उन शहरी सीटों का पूरा चुनावी गणित बदल जाएगा जहां यह वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता था.

NRI पलायन और फर्जी/डुप्लीकेट वोटों पर रोक: अमृतसर, जालंधर, पटियाला और गुरदासपुर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में युवा विदेश (कनाडा, UK आदि) पलायन कर चुके हैं, लेकिन उनके नाम कागजों में दर्ज थे. अनुपस्थित या स्थानांतरित श्रेणी के तहत ऐसे फर्जी और डुप्लीकेट वोटों के हटने से अब वास्तविक धरातलीय वोटरों की संख्या ही उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेगी.

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इन 52 सीटों पर जीत का मार्जिन होगा बेहद कड़ा

औसतन हर सीट पर लगभग 20 हजार से 35 हजार वोटों का फेरबदल हुआ है. पंजाब में पिछले चुनावों के दौरान कई सीटों पर हार-जीत का अंतर 2 हजार से 8 हजार वोटों के बीच रहा था. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में वोटों की छंटनी से आगामी चुनाव में हार-जीत का अंतर बेहद कम और मुकाबला काफी दिलचस्प हो जाएगा.

राजनीतिक दलों का पारंपरिक गणित बिगड़ा: जिन राजनीतिक दलों का वोट बैंक असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, अस्थायी निवासियों या युवाओं पर टिका था, उन्हें अब नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी होगी. सभी दलों को अपने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं (BLO/पन्ना प्रमुखों) के जरिए कटे हुए वास्तविक वोटरों के नाम दोबारा जुड़वाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी.

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SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत पंजाब के 6 बड़े जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. आंकड़ों के मुताबिक इन 6 जिलों में कुल 12 लाख 45 हजार 904 मतदाताओं के नाम ASDD यानी अनअवेलेबल/डिलीटेड कैटेगरी में आए हैं.

इन 6 जिलों में सबसे ज्यादा नाम लुधियाना में हटाए गए हैं.

ग्राफिक्स पर आंकड़े:

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लुधियाना: 4,16,088 — 15.50%

अमृतसर: 2,42,751 — 12.30%

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जालंधर: 1,84,997 — 11.21%

पटियाला: 1,38,624 — 9.12%

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SAS नगर (मोहाली): 1,53,714 — 17.99%

गुरदासपुर: 1,09,730 — 8.48%

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कुल 6 जिले:

52 विधानसभा सीटें | 99,74,207 कुल मतदाता | 12,45,904 ASDD/अनअवेलेबल वोटर | 12.49%

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पंजाब SIR-2022 में 52 सीटों का रिजल्ट
सबसे ज्यादा AAP, कांग्रेस दूसरे नंबर पर

जिला/कुल सीटें

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लुधियाना/14
AAP 13
कांग्रेस (INC) 0
SAD 1

अमृतसर/11
AAP  9
कांग्रेस (INC)  1
SAD     1

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जालंधर/9
AAP      4
कांग्रेस (INC)   5
SAD   0

मोहाली/3
AAP   3
कांग्रेस (INC)  0
SAD       0

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पटियाला/8
AAP   8
कांग्रेस (INC)  0
SAD   0

गुरदासपुर/7

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AAP    2
कांग्रेस (INC)   5
SAD   0

कुल/52

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AAP       39
कांग्रेस (INC) 11
SAD   2

BJP को इन 52 सीटों में से एक पर भी जीत हासिल नहीं हुई थी.

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10 हजार से कम अंतर वाली सीटों पर SIR का असर जानिए…

हार-जीत के मार्जिन से ज्यादा कटे वोट: विधानसभा चुनाव 2022 में पूरे राज्य में 35 सीटें ऐसी थी, जहां पर हार जीत का अंतर 500 से लेकर 9,900 वोटों के बीच था. SIR के तहत इन सीटों पर औसतन 15 हजार से 30 हजार तक वोट कटे या पेंडिंग हैं. कटने वाले वोटों की संख्या जीत के अंतर से दोगुनी या तीन गुनी हो जाती है, तो पिछली जीत का सारा गणित बिगड़ना निश्चित है. इनमें से ज्यादातर सीटों पर आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी.

‘साइलेंट वोटर’ या फर्जी वोटों का सफाया: कम अंतर वाली सीटों पर अकसर फर्जी वोट या एक से अधिक जगह दर्ज नाम निर्णायक साबित होते थे. डिजिटल वेरिफिकेशन से ऐसे नाम हटने के बाद अब केवल वास्तविक मतदाता ही पोलिंग बूथ तक पहुंचेंगे. इससे उन प्रत्याशियों को सबसे बड़ा झटका लगेगा जो फर्जी या अनुपस्थित वोटों के भरोसे मामूली अंतर से जीत दर्ज करते थे.

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दूसरे राज्यों से आए वोटर्स: इन 35 में से कई सीटें शहरी या सेमी-अर्बन इलाकों में आती हैं, जहां वर दूसरे राज्यों से आए मजदूर वर्ग के लोग हैं. उनमें से ज्यादातर लोगों के वोट अपने गृह राज्य में बने हैं. इसलिए उन्होंने यहां अपने वोट कटवा दिए. इसके अलावा उनके दस्तावेज पूरे न होने या पते में बदलाव के कारण इस वर्ग के सबसे ज्यादा वोट कटे हैं. जो दल या प्रत्याशी इस अस्थायी वर्ग पर निर्भर थे, उनकी नींव हिल सकती है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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